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बलिया

गंगा कटान से नौरंगा का अस्तित्व संकट में, प्रशासन के दावों पर भड़के ग्रामीण

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20 करोड़ की योजनाओं पर उठे सवाल, भुआल छपरा के युवाओं ने खुद संभाला कटान रोकने का मोर्चा

बैरिया (बलिया)। तहसील क्षेत्र की नौरंगा ग्राम पंचायत में पिछले एक दशक से गंगा नदी का कटान लगातार तबाही मचा रहा है। कटान के चलते गांव के कई पुरवे नदी में समा चुके हैं और सैकड़ों एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि के साथ अनेक लोगों के आशियाने भी गंगा की धारा में विलीन हो गए हैं। बेघर हुए कई परिवार बक्सर-कोइलवर तटबंध पर फूस की झोपड़ियां बनाकर रहने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों की शिकायत पर शुक्रवार को उपजिलाधिकारी संजय कुशवाहा ने कटान प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान ग्रामीणों ने करोड़ों रुपये खर्च कर लगाए गए पर्को प्वाइंट और एसी बैग जैसी कटानरोधी परियोजनाओं की उपयोगिता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इनके बावजूद कटान क्यों नहीं रुक रहा है। इस पर एसडीएम ने कहा कि वह निरीक्षण रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपेंगे। ग्रामीणों का आरोप है कि इस जवाब से लोगों में नाराजगी बढ़ गई, हालांकि ग्राम प्रधान ने स्थिति को शांत कराया।

20 करोड़ की योजनाओं पर उठे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ विभाग इस वित्तीय वर्ष में करीब 20 करोड़ रुपये की दो योजनाओं के तहत कटानरोधी कार्य कराने का दावा कर रहा है, लेकिन मौके पर कार्य अपेक्षित स्तर पर दिखाई नहीं दे रहा। उनका आरोप है कि प्रभावित क्षेत्र में विभाग के केवल कुछ कर्मचारी ही नजर आए, जबकि कटान लगातार जारी है।

युवाओं ने खुद संभाली जिम्मेदारी

भुआल छपरा के युवाओं ने प्रशासनिक प्रयासों को अपर्याप्त बताते हुए स्वयं बांस-बल्ली और बालू की बोरियों के सहारे कटान रोकने का प्रयास शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी और स्थायी उपाय नहीं किए गए तो लगभग 25 हजार की आबादी वाला नौरंगा गांव गंभीर संकट में पड़ सकता है।

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निरीक्षण के दौरान पूर्व प्रधान राजमंगल ठाकुर, शाहजा ठाकुर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल प्रभावी कटानरोधी कार्य कराने और विस्थापित परिवारों के पुनर्वास की मांग की है।

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