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बलिया

अंतरराष्ट्रीय क्षुद्रग्रह दिवस आज: पृथ्वी के लिए कितना बड़ा खतरा हैं क्षुद्रग्रह

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टुंगुस्का घटना की स्मृति में मनाया जाता है दिवस, वैज्ञानिकों ने निगरानी और वैश्विक सहयोग पर दिया जोर

बलिया। विश्वभर में 30 जून को अंतरराष्ट्रीय क्षुद्रग्रह दिवस मनाया जाता है। यह दिवस वर्ष 1908 में रूस के साइबेरिया स्थित टुंगुस्का क्षेत्र में हुई ऐतिहासिक क्षुद्रग्रह घटना की स्मृति में संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित किया गया है। इसका उद्देश्य क्षुद्रग्रहों से जुड़े संभावित खतरों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उनके अध्ययन को प्रोत्साहित करना है।

मंगल और बृहस्पति के बीच स्थित हैं अधिकांश क्षुद्रग्रह

वरिष्ठ खगोलविद डॉ. गणेश पाठक ने बताया कि क्षुद्रग्रह सौरमंडल के चट्टानी पिंड हैं, जो मुख्य रूप से मंगल और बृहस्पति ग्रहों के बीच स्थित क्षुद्रग्रह घेरे (Asteroid Belt) में पाए जाते हैं। इनमें से कुछ क्षुद्रग्रह अपनी कक्षाओं के कारण पृथ्वी के निकट भी पहुंच जाते हैं।

बड़े क्षुद्रग्रह से टक्कर से हो सकती है भारी तबाही

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डॉ. पाठक के अनुसार यदि कोई बड़ा क्षुद्रग्रह पृथ्वी से टकराता है तो उसके कारण व्यापक विनाश, भीषण भूकंप, सुनामी और जलवायु पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं। इसी कारण दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियां ऐसे पिंडों की लगातार निगरानी कर रही हैं।

2029 में पृथ्वी के पास से गुजरेगा ‘एपोफिस’

उन्होंने बताया कि वर्ष 2029 में ‘एपोफिस’ नामक क्षुद्रग्रह पृथ्वी के बेहद निकट से गुजरेगा। हालांकि मौजूदा वैज्ञानिक आकलनों के अनुसार उसके पृथ्वी से टकराने की कोई आशंका नहीं है, फिर भी इस पर लगातार नजर रखी जा रही है।

खतरे के साथ संसाधनों का भी बड़ा स्रोत

विशेषज्ञों का कहना है कि क्षुद्रग्रह केवल संभावित प्राकृतिक आपदा का कारण ही नहीं हैं, बल्कि इनमें लौह, निकेल, प्लेटिनम जैसी बहुमूल्य धातुओं के विशाल भंडार भी मौजूद हैं। भविष्य में अंतरिक्ष संसाधनों के दोहन की दिशा में इनका महत्व और बढ़ सकता है। वैज्ञानिक इनकी निगरानी, अध्ययन और संभावित बचाव तकनीकों के विकास पर लगातार कार्य कर रहे हैं।

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