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शिक्षा

BHU : प्रश्नपत्र विवाद में जांच कमेटी गठित, निष्पक्षता पर उठे सवाल

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वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के इतिहास विभाग की सेमेस्टर परीक्षा में पूछे गए विवादित और पाठ्यक्रम से बाहर के प्रश्न को लेकर मामला अब नए प्रशासनिक और वैचारिक विवाद में उलझता नजर आ रहा है। चारों ओर से बढ़ते दबाव के बीच पहले विभाग का कोई भी शिक्षक इस संवेदनशील प्रकरण की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं था, लेकिन विवाद बढ़ने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने अंततः फैक्ट फाइंडिंग कमेटी (तथ्य अन्वेषण समिति) का गठन कर दिया है।

हालांकि, समिति के गठन के साथ ही एक नया विवाद भी सामने आ गया है। लंबे समय तक चले गतिरोध के बाद गठित तीन सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की अध्यक्षता प्रो. केशव मिश्रा को सौंपी गई है। समिति में पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. घनश्याम और सहायक प्रोफेसर डा. सीमा मिश्रा को सदस्य बनाया गया है।

कमेटी के गठन के बाद विश्वविद्यालय परिसर में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। जिस प्रश्नपत्र को लेकर विवाद खड़ा हुआ, उसका माडरेशन प्रो. घनश्याम के निर्देशन में किया गया था। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जो प्रोफेसर स्वयं उस प्रश्नपत्र को अंतिम रूप देने वाली त्रिस्तरीय माडरेशन प्रणाली का हिस्सा थे, उन्हें ही जांच समिति में शामिल करना निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

कमेटी के गठन से पहले विभाग के भीतर वैचारिक मतभेद और तनाव की स्थिति बनी हुई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विभाग का कोई भी वरिष्ठ प्रोफेसर इस प्रकरण में हस्तक्षेप करने को तैयार नहीं था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने निष्पक्ष जांच का हवाला देते हुए कई अनुभवी शिक्षकों से संपर्क कर उन्हें जांच की जिम्मेदारी सौंपने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन अधिकांश शिक्षकों ने इस विवाद से दूरी बनाए रखना ही उचित समझा। शिक्षकों के इस रुख से प्रशासनिक स्तर पर कुछ समय के लिए असमंजस की स्थिति बन गई थी।

इस पूरे मामले में अब तक स्थिति दोतरफा बनी हुई है। प्रश्नपत्र तैयार करने वाली पेपर सेटर प्रो. सुतपा दास से पहले ही स्पष्टीकरण मांगा जा चुका है और उन्होंने अपना लिखित जवाब भी प्रशासन को सौंप दिया है। विभागाध्यक्ष और विशेषज्ञ समिति को मिलाकर काम करने वाली त्रिस्तरीय माडरेशन प्रणाली इस विवादित प्रश्न को रोकने में पूरी तरह विफल साबित हुई।

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अब नई गठित कमेटी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि आधुनिक इतिहास के प्रश्नपत्र में प्राचीन काल से जुड़ा यह विवादित प्रश्न आखिर किस स्तर की लापरवाही के चलते छपकर परीक्षा कक्ष तक पहुंच गया। फिलहाल, “अपनों की जांच, अपनों के हाथ” वाले इस फार्मूले के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि समिति की रिपोर्ट आने के बाद कुलपति अगला कदम क्या उठाते हैं।

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