भदोही
गुरु कृपा से ही ईश्वर का साक्षात्कार संभव
आज श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाएगी गुरु पूर्णिमा
ज्ञानपुर। आषाढ़ मास की पूर्णिमा पर मनाया जाने वाला गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व मंगलवार को पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। सनातन परंपरा में इस दिन गुरु पूजन का विशेष महत्व है। मंदिरों, आश्रमों और शिक्षण संस्थानों में गुरु वंदन के साथ विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
गुरु पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ. महेश त्रिपाठी ने बताया कि वर्षा ऋतु के आरंभ में आने वाले इस पर्व से चातुर्मास की शुरुआत होती है। इस दौरान परिव्राजक साधु-संत एक ही स्थान पर रहकर धर्म, ज्ञान और आध्यात्म का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि यह समय अध्ययन, साधना और आत्मचिंतन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
उन्होंने बताया कि गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है, क्योंकि इसी दिन महाभारत के रचयिता और वेदों के संकलनकर्ता महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। भारतीय संस्कृति में उन्हें आदिगुरु का स्थान प्राप्त है। उनके सम्मान में ही इस दिन गुरु पूजन की परंपरा प्रचलित हुई।
डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि ‘गु’ का अर्थ अंधकार और ‘रु’ का अर्थ उस अंधकार का नाश करने वाला होता है। गुरु वह है जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाता है। उन्होंने कहा कि सद्गुरु की कृपा से ही ईश्वर का साक्षात्कार संभव है और गुरु के मार्गदर्शन के बिना आध्यात्मिक उन्नति अधूरी मानी जाती है।
उन्होंने बताया कि प्राचीन काल में विद्यार्थी गुरु के आश्रम में निःशुल्क शिक्षा प्राप्त करते थे और गुरु पूर्णिमा के दिन श्रद्धा एवं सामर्थ्य के अनुसार गुरु दक्षिणा अर्पित कर उनका आशीर्वाद लेते थे। आज भी विद्यालयों, संगीत एवं कला संस्थानों में गुरु के प्रति सम्मान व्यक्त करने की यह परंपरा पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, पवित्र नदियों में स्नान, भंडारों का आयोजन तथा विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम होंगे। श्रद्धालु अपने गुरुजनों का आशीर्वाद लेकर जीवन में ज्ञान, सदाचार और आध्यात्मिक उन्नति का संकल्प लेंगे।
