शिक्षा
गाजीपुर में 250 से अधिक शिक्षकों की सैलरी रुकी, बनारस के 33 स्कूलों को नोटिस
वाराणसी/गाजीपुर। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में शैक्षिक सत्र 2026-27 के नए नामांकन के आंकड़ों ने व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां कुछ जिलों ने टाप-20 सूची में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है, वहीं कई बड़े जिले औसत प्रदर्शन तक ही सीमित रह गए हैं। पूर्वांचल में भदोही ने दूसरा स्थान हासिल किया है।
मिर्जापुर जिला पांचवें स्थान पर रहा, जबकि वाराणसी को 20वां स्थान मिला है। शिक्षा विभाग के विभिन्न दावों और अभियानों के बावजूद जिले का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं माना जा रहा है। बनारस में पिछले वर्ष 46,197 बच्चों का पंजीकरण हुआ था, जबकि इस सत्र में अब तक 31,656 बच्चों का ही नामांकन हो सका है। इस प्रकार कुल 68.52 प्रतिशत नामांकन दर्ज किया गया।
जिले के 33 से अधिक परिषदीय विद्यालय ऐसे पाए गए हैं, जहां सात से ज्यादा नामांकन नहीं हो सके। इस मामले में संबंधित प्रधानाध्यापकों को नोटिस जारी किया गया है और विभागीय कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। वहीं गाजीपुर में 90 विद्यालय ऐसे मिले हैं, जहां एक भी नया नामांकन नहीं हुआ। इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार ढाई सौ से अधिक शिक्षकों का वेतन रोक दिया गया है।
बेसिक शिक्षा विभाग का कहना है कि विद्यालयों में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित कराने के प्रयास लगातार जारी हैं। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि कई जिलों के औसत प्रदर्शन को देखते हुए भदोही मॉडल से सीख लेकर रणनीति में बदलाव करने की जरूरत है।
बेसिक शिक्षा विभाग के सहायक निदेशक हेमंत राव ने बताया कि शिक्षक और विभागीय टीमें घर-घर जाकर अभिभावकों को जागरूक कर रही हैं। उनका कहना है कि विभाग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नए सत्र में कोई भी बच्चा शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे और अधिक से अधिक बच्चों का सरकारी विद्यालयों में प्रवेश कराया जा सके।
बीएसए अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि नामांकन के मामले में बनारस का टाप-20 में स्थान बनाना भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से लगातार बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं ताकि स्कूल चलो अभियान को और गति मिल सके। साथ ही पिछले सप्ताह की तुलना में शिक्षकों ने प्रदर्शन सुधारने की दिशा में बेहतर कोशिश की है।
