गाजीपुर
गृहकर व टैक्स वृद्धि को लेकर जमानियां नगर पालिका में घमासान
21 सभासदों ने शुरू किया अनिश्चितकालीन धरना, अध्यक्ष पर लगाए मनमानी के आरोप
सभासद बोले- टैक्स वृद्धि वापस नहीं हुई तो डीएम को सौंपेंगे सामूहिक इस्तीफा, अध्यक्ष ने आरोपों को बताया निराधार
जमानियां (गाजीपुर)। नगर पालिका परिषद जमानियां में गृहकर एवं अन्य टैक्स में बढ़ोतरी को लेकर अध्यक्ष और सभासदों के बीच विवाद गहरा गया है। नगर पालिका अध्यक्ष जयप्रकाश गुप्ता की कार्यशैली और कथित मनमानी के विरोध में सभासदों ने अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। सभासदों का आरोप है कि टैक्स में भारी बढ़ोतरी कर नगर की जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला गया है।
टैक्स बढ़ोतरी के विरोध में धरने पर बैठे सभासद
धरने पर बैठे सभासद प्रमोद यादव, राहुल वर्मा, मोहन गुप्ता, राजा चौधरी सहित अन्य सदस्यों का कहना है कि बोर्ड बैठक में सामान्य कर वृद्धि की बात कही गई थी, लेकिन बाद में कथित रूप से कई गुना टैक्स बढ़ा दिया गया। सभासदों ने आरोप लगाया कि इस संबंध में उन्हें उचित जानकारी नहीं दी गई।

विरोध कर रहे सभासदों का कहना है कि नगर में अपेक्षित विकास कार्य नहीं हो रहे हैं। ऐसे में जनता पर अतिरिक्त कर का बोझ डालना उचित नहीं है। उन्होंने टैक्स वृद्धि को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
21 सभासदों ने दी सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी
धरने पर बैठे सभासदों ने चेतावनी दी कि यदि टैक्स वृद्धि वापस नहीं ली गई और उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो 21 सभासद सामूहिक रूप से जिलाधिकारी को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं। सभासदों का कहना है कि उनका विरोध जनता के हित में है और मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
अध्यक्ष ने आरोपों को किया खारिज
वहीं नगर पालिका अध्यक्ष जयप्रकाश गुप्ता ने सभासदों के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने शासनादेश और बोर्ड बैठक से संबंधित दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि कर निर्धारण की प्रक्रिया नियमानुसार और सर्वसम्मति से पारित की गई थी।

अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कुछ सभासद निजी स्वार्थ और लाभ के लिए जनता को भ्रमित कर रहे हैं तथा अनावश्यक दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नगर पालिका की ओर से सभी कार्य नियमों के अनुरूप किए जा रहे हैं।
टैक्स वृद्धि को लेकर अध्यक्ष और सभासदों के आमने-सामने आने से नगर पालिका की राजनीति गरमा गई है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस विवाद में किस तरह हस्तक्षेप करता है और धरने पर बैठे सभासदों की मांगों का क्या समाधान निकलता है।
