गोरखपुर
एमएमएमयूटी में खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते, तीन नए बीटेक कोर्स को मंजूरी
विद्या परिषद की 41वीं बैठक में अहम फैसले, स्मार्ट प्रोसेस इंडस्ट्रीज सेंटर की स्थापना को भी मिली स्वीकृति
गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) गोरखपुर में तकनीकी शिक्षा को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। विश्वविद्यालय की विद्या परिषद की 41वीं बैठक में विद्यार्थियों के भविष्य और उद्योगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा की अध्यक्षता में अटल भवन बोर्ड रूम में आयोजित बैठक में तीन नए बीटेक पाठ्यक्रमों सहित कई प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की गई।
2027-28 से शुरू होंगे तीन नए बीटेक पाठ्यक्रम
बैठक में केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के बीटेक इन फूड टेक्नोलॉजी, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के बीटेक मैकेनिकल एंड मेकाट्रॉनिक्स (एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग) और गणित विभाग के बीटेक मैथमेटिक्स एंड कंप्यूटिंग पाठ्यक्रम को स्वीकृति दी गई।
इन पाठ्यक्रमों में 30-30 सीटें निर्धारित की गई हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन नए पाठ्यक्रमों से विद्यार्थियों को बदलते तकनीकी क्षेत्र में बेहतर अवसर मिलेंगे और उद्योगों को आवश्यक कुशल मानव संसाधन उपलब्ध होगा।
स्मार्ट तकनीक पर होगा विशेष जोर
विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर स्मार्ट प्रोसेस इंडस्ट्रीज की स्थापना को भी मंजूरी दी गई है। इस केंद्र के माध्यम से स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और आधुनिक औद्योगिक तकनीकों पर शोध एवं प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा।
यह केंद्र विद्यार्थियों को इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के साथ शोधकर्ताओं को नई तकनीकों पर काम करने का अवसर देगा।
तीन नए पीजी कोर्स को भी मिली हरी झंडी
विद्या परिषद ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से शुरू होने वाले तीन नए परास्नातक पाठ्यक्रमों को भी मंजूरी दी। इनमें एमफार्म फार्मास्यूटिक्स, एमफार्म फार्मास्युटिकल केमिस्ट्री और एमटेक एवियोनिक्स शामिल हैं।
पीएचडी नियमों में बदलाव, शोध गुणवत्ता पर जोर
बैठक में पीएचडी ऑर्डिनेंस में बदलाव को भी मंजूरी दी गई। अब स्नातक के बाद सीधे पीएचडी में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को 20 क्रेडिट का कोर्स वर्क पूरा करना होगा, जबकि परास्नातक के बाद पीएचडी करने वालों के लिए 12 क्रेडिट का कोर्स वर्क निर्धारित रहेगा।
इसके अलावा पीएचडी शोधार्थियों के लिए शोध पत्र प्रकाशित करने के नियमों को भी सख्त किया गया है। अब शोध प्रबंध जमा करने से पहले शोधार्थी को अपने विषय से संबंधित कम से कम दो शोध पत्र स्कोपस, एससीआई, एससीआईई या ईएससीआई सूचीबद्ध जर्नल में प्रकाशित कराने होंगे।
11वें दीक्षांत समारोह की तैयारियों पर भी मुहर
बैठक में विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में प्रदान की जाने वाली उपाधियों को भी मंजूरी दी गई। इसमें हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक विकास कौशल को प्रदान की जाने वाली डीएससी की मानद उपाधि और मेधावी विद्यार्थियों को दिए जाने वाले स्वर्ण पदक शामिल हैं।
कम प्रवेश वाले पाठ्यक्रमों की होगी समीक्षा
विद्या परिषद ने पिछले तीन वर्षों से कम प्रवेश वाले परास्नातक पाठ्यक्रमों की समीक्षा कराने का निर्णय लिया है। संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांगी जाएगी कि ऐसे पाठ्यक्रमों को जारी रखा जाए या उनकी जगह नए और उपयोगी पाठ्यक्रम शुरू किए जाएं।
बैठक में कुलसचिव श्री चंद्र प्रकाश प्रियदर्शी ने कार्यसूची प्रस्तुत की। इस दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों की प्रगति रिपोर्ट, नए सिलेबस, संशोधित क्रेडिट स्ट्रक्चर और कोर्स कोड में बदलाव को भी स्वीकृति प्रदान की गई। जुलाई 2026 में प्रवेश लेने वाले 97 पीएचडी छात्रों की जानकारी भी परिषद के समक्ष रखी गई।
