गाजीपुर
रासायनिक खाद की किल्लत से किसान परेशान
नैनो यूरिया-डीएपी बना सहारा
धान रोपाई के बीच सहकारी समितियों पर नहीं मिल रही पारंपरिक खाद, किसान आधुनिक विकल्प अपना रहे
बहरियाबाद (गाजीपुर)। धान रोपाई के चरम सीजन में बहरियाबाद क्षेत्र के किसानों को रासायनिक खाद की कमी का सामना करना पड़ रहा है। साधन सहकारी समितियों पर यूरिया और डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने से किसान खाद के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में किसान अब नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का प्रयोग कर रहे हैं।
क्षेत्र में इन दिनों धान की रोपाई तेजी से चल रही है, लेकिन पारंपरिक दानेदार उर्वरकों की कमी के कारण किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पा रही है। किसानों का कहना है कि वे कई दिनों से सहकारी समितियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं हो रही है।
इसी बीच नैनो तकनीक आधारित नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए विकल्प बनकर उभरे हैं। इफको द्वारा विकसित ये तरल उर्वरक बाजार और कुछ सहकारी समितियों पर आसानी से उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों के अनुसार नैनो यूरिया का छिड़काव सीधे पत्तियों पर किया जाता है, जिससे पौधे 80 से 90 प्रतिशत तक पोषक तत्वों को अवशोषित कर लेते हैं, जबकि पारंपरिक खाद का उपयोग मिट्टी के माध्यम से होने पर इसकी उपयोगिता लगभग 30 से 40 प्रतिशत ही रहती है।
किसानों का कहना है कि नैनो उर्वरक पारंपरिक खाद की तुलना में किफायती भी हैं और खाद की कमी के बीच फसल की बढ़वार बनाए रखने में मददगार साबित हो रहे हैं। हालांकि किसानों ने मांग की है कि सरकार धान रोपाई के मौसम को देखते हुए सहकारी समितियों पर यूरिया और डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करे, ताकि उन्हें खाद के लिए परेशान न होना पड़े।
