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गाजीपुर

विलुप्त होती पक्षियों की दुनिया बचाने का समय, ‘पक्षी बचाओ–प्रकृति बचाओ’ अभियान तेज करने की जरूरत

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गौरैया, गिद्ध और सारस जैसे पक्षियों का अस्तित्व खतरे में, पर्यावरण संरक्षण के लिए जनभागीदारी का आह्वान

पेड़ लगाएं, दाना-पानी रखें, कृत्रिम घोंसले बनाएं और जैविक खेती अपनाएं, तभी बचेगी प्रकृति की अनमोल धरोहर

बहरियाबाद (गाजीपुर)। तेजी से बदलते पर्यावरण और आधुनिक जीवनशैली के बीच गौरैया, गिद्ध, सारस, कोयल सहित कई परिचित पक्षियों का अस्तित्व लगातार संकट में पड़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते पक्षियों के संरक्षण के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियां इन्हें केवल पुस्तकों और चित्रों में ही देख पाएंगी। ऐसे में ‘पक्षी बचाओ, प्रकृति बचाओ’ अभियान को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

पर्यावरण प्रेमियों के अनुसार, कंक्रीट के बढ़ते जंगलों के कारण पक्षियों के प्राकृतिक आवास तेजी से समाप्त हो रहे हैं। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, रासायनिक कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग, पुराने घरों की जगह आधुनिक भवनों का निर्माण तथा बदलती जीवनशैली के चलते गौरैया जैसे छोटे पक्षियों को घोंसला बनाने के लिए सुरक्षित स्थान भी नहीं मिल पा रहे हैं। इससे उनकी संख्या लगातार घट रही है।

पक्षी केवल प्रकृति की सुंदरता ही नहीं बढ़ाते, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गिद्ध और चील जैसे पक्षी मृत पशुओं को खाकर वातावरण को स्वच्छ रखते हैं, जबकि मैना, बगुला, गौरैया और उल्लू जैसे पक्षी फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों और चूहों को नियंत्रित कर किसानों के सहयोगी बनते हैं। वहीं कई पक्षी परागण और बीजों के प्रसार में भी अहम भूमिका निभाते हैं, जिससे वनस्पतियों का प्राकृतिक विस्तार होता है।

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पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों से अपने घरों की छत, बालकनी और आंगन में पक्षियों के लिए दाना और स्वच्छ पानी रखने, कृत्रिम घोंसले लगाने तथा पीपल, बरगद, नीम, महुआ और अमरूद जैसे स्वदेशी पेड़ लगाने की अपील की गई है। साथ ही खेती में जैविक खाद और प्राकृतिक कीटनाशकों के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है।

पर्यावरणविदों का कहना है कि पक्षियों का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। यदि पक्षियों की यह महत्वपूर्ण कड़ी टूटती है तो इसका सीधा असर पर्यावरण और मानव जीवन पर भी पड़ेगा। इसलिए प्रकृति के इस अनमोल खजाने को बचाने के लिए सामूहिक प्रयास समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

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