गाजीपुर
सद्बुद्धि और सद्भाव से ही बनता है समृद्ध समाज, कुबुद्धि लाती है विनाश : ब्रह्मानंद पांडेय
भांवरकोल (गाजीपुर)। भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में सद्बुद्धि, प्रेम और सद्भाव को समाज की सबसे बड़ी शक्ति माना गया है। इसी संदर्भ में ब्राह्मण समाज के महासचिव पंडित ब्रह्मानंद पांडेय ने गोस्वामी तुलसीदास की प्रसिद्ध चौपाई—
“जहाँ सुमति तहँ संपति नाना। जहाँ कुमति तहँ बिपति निदाना॥”
—का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल धार्मिक उपदेश नहीं, बल्कि जीवन का शाश्वत सत्य है।
उन्होंने कहा कि जहां अच्छे विचार, परस्पर प्रेम, सहयोग और सकारात्मक सोच होती है, वहां सुख, शांति, समृद्धि और विकास स्वतः आता है। वहीं द्वेष, ईर्ष्या, घृणा और कुबुद्धि अंततः व्यक्ति और समाज को संकट तथा विनाश की ओर ले जाती है।
पंडित ब्रह्मानंद पांडेय ने कहा कि परिवार, समाज, गांव और राष्ट्र की उन्नति तभी संभव है, जब लोग मतभेदों को भुलाकर प्रेम, भाईचारे और सद्भाव के मार्ग पर चलें। इतिहास इस बात का साक्षी है कि जिन समाजों ने एकता और सद्बुद्धि को अपनाया, उन्होंने विकास के नए आयाम स्थापित किए, जबकि आपसी वैमनस्य ने कई सभ्यताओं को पतन की ओर धकेल दिया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सामाजिक सौहार्द, नैतिक मूल्यों और सकारात्मक चिंतन का महत्व पहले से अधिक बढ़ गया है। आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर, संस्कारित और समृद्ध समाज के निर्माण हेतु प्रत्येक व्यक्ति को सद्बुद्धि, सहयोग, सदाचार और प्रेम को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे तुलसीदास की इस अमूल्य सीख को जीवन में उतारें, क्योंकि जहां सुमति होती है, वहीं सुख और संपन्नता का वास होता है, जबकि कुमति अंततः विपत्तियों को जन्म देती है।
