वाराणसी
वाराणसी: विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान शुरू, एक माह तक घर-घर होगा स्वास्थ्य सर्वे
बुखार, टीबी और कुपोषित मरीजों की पहचान के लिए चलेगा अभियान
जनजागरूकता रैली के साथ हुआ शुभारंभ
वाराणसी। मानसून के दौरान बढ़ने वाले संक्रामक एवं वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जनपद में विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान और दस्तक अभियान की शुरुआत कर दी है। एक जुलाई से शुरू हुआ यह अभियान पूरे महीने चलेगा, जिसके तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर बुखार, टीबी, कुपोषण और अन्य गंभीर बीमारियों से प्रभावित लोगों की पहचान करेंगी।
अभियान का शुभारंभ शहर दक्षिणी विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार ने जनजागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर किया।
घर-घर जाकर होगा स्वास्थ्य सर्वे
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि अभियान के दौरान आशा, एएनएम और स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर बुखार से पीड़ित लोगों की पहचान करेंगी। साथ ही टीबी के संभावित मरीजों की स्क्रीनिंग, कुपोषित बच्चों की पहचान तथा अन्य संक्रामक रोगों से प्रभावित लोगों का सर्वे भी किया जाएगा।
जरूरत पड़ने पर मरीजों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच और उपचार के लिए भेजा जाएगा।
स्वच्छता और मच्छर नियंत्रण पर रहेगा विशेष जोर
यह अभियान स्वास्थ्य विभाग के साथ नगर निगम, पंचायती राज, शिक्षा, बाल विकास एवं पुष्टाहार, जल निगम और ग्राम्य विकास विभाग के समन्वय से संचालित किया जाएगा।
अभियान के तहत नालियों की सफाई, जलभराव वाले क्षेत्रों का चिन्हांकन, झाड़ियों की कटाई, एंटी-लार्वा छिड़काव, फॉगिंग और स्वच्छता अभियान भी चलाए जाएंगे।
साफ-सफाई से रोकी जा सकती हैं गंभीर बीमारियां
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि संचारी रोगों की रोकथाम के लिए जनजागरूकता और स्वच्छता सबसे प्रभावी उपाय हैं। यदि लोग अपने घर और आसपास सफाई रखें तथा जलभराव न होने दें, तो डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और जापानी इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
बुखार होने पर तुरंत कराएं जांच
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे घरों के आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं और बुखार आने पर स्वयं दवा लेने के बजाय निकटतम सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच कराएं।
अधिकारियों का कहना है कि समय पर जांच और उपचार से संचारी रोगों की गंभीरता को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
