वाराणसी
काशी में जगन्नाथ रथयात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में, पुरी से आएंगी 500 विशेष पताकाएं
108 डमरू दल और इस्कॉन का संकीर्तन होंगे मुख्य आकर्षण
15 जुलाई को निकलेगी भगवान जगन्नाथ की भव्य डोलीयात्रा
वाराणसी | धर्मनगरी काशी में भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। इस वर्ष रथयात्रा और डोलीयात्रा को और अधिक भव्य बनाने के लिए ओडिशा के पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर से 500 विशेष पताकाएं (ध्वज) मंगाई जा रही हैं। श्रद्धालु इन पवित्र पताकाओं के साथ भगवान के जयघोष करते हुए यात्रा में शामिल होंगे।
ट्रस्ट श्री जगन्नाथ मंदिर के सचिव शैलेष त्रिपाठी ने बताया कि 15 जुलाई की शाम अस्सी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की भव्य डोलीयात्रा निकलेगी।

डमरू दल और संकीर्तन से गूंजेगी काशी
इस वर्ष डोलीयात्रा का प्रमुख आकर्षण 108 डमरू दलों की सामूहिक प्रस्तुति होगी। भगवान की डोली के आगे डमरुओं की गूंज श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव कराएगी।
वहीं, दुर्गाकुंड स्थित इस्कॉन मंदिर की 40 सदस्यीय संकीर्तन मंडली हरिनाम संकीर्तन करते हुए पूरी यात्रा में शामिल रहेगी। मार्ग में श्रद्धालु पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत करेंगे।
भगवान को लगाया जा रहा औषधीय काढ़े का भोग

रथयात्रा से पहले भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को स्वास्थ्य लाभ की परंपरा के तहत लौंग, इलायची, दालचीनी, तेजपत्ता और अन्य औषधीय सामग्री से तैयार विशेष काढ़े का भोग लगाया जा रहा है।
मंदिर में प्रतिदिन शाम 4:30 बजे से यह काढ़ा प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में वितरित किया जा रहा है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसे श्रद्धापूर्वक ग्रहण कर रहे हैं।
224 वर्षों से निभाई जा रही परंपरा
ट्रस्ट के अनुसार, अस्सी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान के विग्रह की स्थापना वर्ष 1790 में हुई थी। इसके बाद वर्ष 1802 से काशी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का आयोजन लगातार किया जा रहा है।
करीब 224 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा काशी की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।
देश-विदेश से पहुंचते हैं श्रद्धालु
हर वर्ष देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु काशी की ऐतिहासिक जगन्नाथ रथयात्रा में शामिल होने पहुंचते हैं। इस बार पुरी से आने वाली विशेष पताकाएं, 108 डमरू दलों की प्रस्तुति, इस्कॉन का हरिनाम संकीर्तन और पुष्पवर्षा इस आयोजन को और अधिक भव्य एवं आकर्षक बनाएंगे।
