गाजीपुर
मोहर्रम पर अकीदत के साथ ताजियों को किया गया ठंडा
बहरियाबाद व आसपास के गांवों से निकले जुलूस, कर्बला में संपन्न हुई रस्म
बहरियाबाद (गाजीपुर। मोहर्रम के अवसर पर बहरियाबाद एवं आसपास के मुस्लिम बहुल गांवों से निकाले गए ताजियों को देर रात अकीदत और धार्मिक परंपराओं के अनुसार उनके-अपने कर्बला में ले जाकर ठंडा (सुपुर्द-ए-खाक) किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे और पूरे क्षेत्र में गम एवं श्रद्धा का माहौल रहा।

ताजिया, इमाम हुसैन (पैगंबर मोहम्मद के नवासे) के इराक स्थित कर्बला के रौज़े (मकबरे) का प्रतीक माना जाता है। मोहर्रम की पहली से दसवीं तारीख तक ताजियों को सम्मानपूर्वक घरों एवं इमामबाड़ों में रखा जाता है, जिसे ताज़ियादारी कहा जाता है। आशूरा के दिन ताजियों का जुलूस पारंपरिक मार्गों से होकर कर्बला पहुंचता है, जहां धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार उन्हें ठंडा किया जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, कर्बला की जंग में इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत के बाद उनके पार्थिव शरीर कई दिनों तक बिना कफ़न-दफ़न के पड़े रहे थे। ताजियों को कर्बला में ठंडा करना उसी ऐतिहासिक घटना की याद में इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को प्रतीकात्मक श्रद्धांजलि एवं सम्मानजनक विदाई देने की परंपरा का हिस्सा माना जाता है।
