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गाजीपुर

बहरियाबाद में अकीदत के साथ निकाला गया ताजिया, गूंजती रहीं ‘या हुसैन’ की सदाएं

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हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल, देर रात तक जियारत के लिए उमड़े अकीदतमंद

लाठी, बनेती और तलवारबाजी के पारंपरिक खेलों ने मोहा लोगों का मन

बहरियाबाद (गाजीपुर)। मोहर्रम के अवसर पर बहरियाबाद नगर एवं आसपास के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में गुरुवार को पूरे एहतराम और अकीदत के साथ ताजिया निकाला गया। विभिन्न मोहल्लों और गांवों से पारंपरिक रूप से निकले ताजियों में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। देर रात तक ताजिया के दीदार और जियारत के लिए जायरीन का तांता लगा रहा।

उत्तर मोहल्ला से ताजियादार शमीमुलवरा, दक्षिण मोहल्ला से काजी हेसामुद्दीन, काजी शहाबुद्दीन, बादशाह और मुंतज़िर वकील, मलिकनगांव से महफूज आलम, रुकनपुर दरगाह से अतहर जमाल तथा बघांव (देईपुर) से हाजी फरीद अंसारी एवं अबरार अंसारी के नेतृत्व में ताजिया पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ निकाला गया।

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मातमी जुलूस पूरे क्षेत्र का भ्रमण करते हुए चौक पर पहुंचा, जहां ताजिया रखा गया। पूरी रात “या हुसैन” की सदाओं से माहौल गमगीन और श्रद्धामय बना रहा। ताजिया जुलूस में गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरत मिसाल देखने को मिली। बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोगों ने भी आयोजन में सहभागिता कर आपसी भाईचारे का संदेश दिया।

किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा।

पुलिस बल ने पूरे क्षेत्र में लगातार गश्त की। वहीं, भीषण गर्मी को देखते हुए विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए शरबत और ठंडे पानी की व्यवस्था की गई।

मोहर्रम के अवसर पर पारंपरिक युद्धक कलाओं का भी प्रदर्शन किया गया। युवाओं ने लाठी चलाना, बनेती घुमाना, तलवारबाजी, ढाल-तलवार तथा अन्य पारंपरिक करतब प्रस्तुत कर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।

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