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बलिया

आपातकाल की वर्षगांठ पर मनाया गया काला दिवस

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लोकतंत्र सेनानियों ने महात्मा गांधी प्रतिमा के समक्ष किया विरोध प्रदर्शन

राज्य सरकारों से सम्मानजनक सुविधाएं और सहायता राशि देने की मांग

बलिया। देश में लगाए गए आपातकाल की वर्षगांठ पर गुरुवार को शहीद पार्क स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष लोकतंत्र सेनानियों एवं नागरिकों ने काला दिवस मनाया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश लोकतंत्र कल्याण समिति की ओर से सिटी मजिस्ट्रेट आसाराम वर्मा को ज्ञापन सौंपा गया।

ज्ञापन में मांग की गई कि आपातकाल के दौरान संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानियों को विभिन्न राज्यों में विधिवत मान्यता प्रदान करते हुए सम्मानजनक सहायता राशि एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। कार्यक्रम में उपस्थित लोकतंत्र सेनानियों ने आपातकाल का विरोध जताते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प लिया।

आपातकाल को बताया लोकतंत्र का काला अध्याय

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोकतंत्र सेनानी द्विजेंद्र कुमार मिश्र ने कहा कि 25 जून 1975 को लागू किया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय था। उन्होंने कहा कि उस दौर में बलिया ने भी लोकतंत्र की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जिले में लोकदल, जनसंघ और छात्र-युवा संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किए, जिसके चलते अनेक नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।

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वक्ताओं ने आपातकाल के दौरान हुए दमन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगाए गए प्रतिबंधों तथा लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन को याद करते हुए नई पीढ़ी को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया।

बड़ी संख्या में लोग रहे उपस्थित

कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानी पांडेय गोविंद जी, द्विजेंद्र कुमार मिश्र, धनराज सिंह, चंद्रशेखर सिंह, संतोष शुक्ला, पूर्व ब्लॉक प्रमुख अनिल सिंह, शिवशरण तिवारी, अकमल नईम खान, गोपाल सिंह, दीनानाथ गांधी, सुनील सिंह, सुशील यादव, अखिलेश सिंह, दिलीप सिंह सहित अनेक बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने लोकतंत्र की मजबूती और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

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