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आजमगढ़

आईपीएमएस पोर्टल पर पंजीकरण न कराने वाले 205 कीटनाशी विक्रेताओं को अंतिम चेतावनी

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तीन दिन में पंजीकरण कराएं, अन्यथा लाइसेंस निरस्त कर होगी कठोर कार्रवाई

आजमगढ़। जिला कृषि रक्षा अधिकारी हिमांचल सोनकर ने आईपीएमएस (एकीकृत कीटनाशी प्रबंधन प्रणाली) पोर्टल पर पंजीकरण न कराने वाले 205 कीटनाशी विक्रेताओं को अंतिम चेतावनी जारी की है। उन्होंने निर्देश दिया है कि सभी अवशेष थोक एवं फुटकर कीटनाशी विक्रेता तीन दिन के भीतर अपना पंजीकरण सुनिश्चित करें, अन्यथा उनके लाइसेंस निरस्त कर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

838 में से केवल 633 विक्रेताओं ने कराया पंजीकरण

जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार द्वारा विकसित आईपीएमएस पोर्टल पर पंजीकरण के लिए जनपद के सभी कीटनाशी विक्रेताओं को विभिन्न बैठकों, व्हाट्सएप समूहों तथा क्षेत्रीय कर्मचारियों के माध्यम से लगातार निर्देशित किया गया था।

समीक्षा में पाया गया कि 19 जून 2026 तक जनपद के कुल 838 पंजीकृत कीटनाशी विक्रेताओं में से मात्र 633 विक्रेताओं ने ही पोर्टल पर पंजीकरण कराया है, जबकि 205 विक्रेता अभी भी पंजीकरण से वंचित हैं।

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किसानों को गुणवत्तापूर्ण कीटनाशक उपलब्ध कराने की पहल

उन्होंने बताया कि आईपीएमएस पोर्टल का उद्देश्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण कीटनाशी रसायनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना तथा नकली, अपंजीकृत एवं बिना लाइसेंस के कीटनाशकों के उत्पादन और बिक्री पर प्रभावी रोक लगाना है।

पहले भी दिए जा चुके हैं निर्देश

हिमांचल सोनकर ने बताया कि पंजीकरण नहीं कराने वाले विक्रेताओं के लाइसेंस पूर्व में निलंबित करते हुए उन्हें तत्काल पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई थी कि निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी न करने पर लाइसेंस निरस्त किए जा सकते हैं।

लाइसेंस निरस्तीकरण की होगी कार्रवाई

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जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने कहा कि शेष सभी विक्रेता अगले तीन दिनों के भीतर आईपीएमएस पोर्टल पर अपना पंजीकरण शीर्ष प्राथमिकता के आधार पर पूरा करें। अन्यथा बिना पंजीकरण कृषि रक्षा रसायनों का विक्रय करने वाले विक्रेताओं को चिन्हित कर उनके लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि दोषी पाए जाने पर संबंधित विक्रेताओं के विरुद्ध कीटनाशी अधिनियम-1968 एवं कीटनाशी नियम-1971 के तहत भी कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

विक्रेता स्वयं होंगे जिम्मेदार

विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि में पंजीकरण न कराने की स्थिति में होने वाली समस्त कार्रवाई के लिए संबंधित कीटनाशी विक्रेता स्वयं जिम्मेदार होंगे।

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