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गोरखपुर

भागवत कथा में धुंधकारी प्रसंग सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

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कथा व्यास अनुराधा तिवारी ने सुनाई श्रीमद्भागवत की महिमा

धुंधकारी के उद्धार की कथा से मिला धर्म और भक्ति का संदेश

गोला बाजार, गोरखपुर। गोला तहसील क्षेत्र के ग्राम दीपगढ़ में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रीधाम वृंदावन से पधारीं कथा व्यास अनुराधा तिवारी ने धुंधकारी प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए और पूरे पंडाल में भक्ति का वातावरण छा गया।

कथा व्यास ने बताया कि प्राचीन काल में तुंगभद्रा नदी के तट पर आत्मदेव नामक ब्राह्मण अपनी पत्नी धुंधुली के साथ रहते थे। संतान न होने के कारण वे दुखी थे। भगवान शिव की कृपा से उन्हें दो पुत्र प्राप्त हुए। बड़े पुत्र गोकर्ण जन्म से ही ज्ञानी और धर्मपरायण थे, जो आगे चलकर तपस्या के लिए चले गए। वहीं छोटा पुत्र धुंधकारी बुरे कर्मों में लिप्त हो गया।

उन्होंने बताया कि धुंधकारी ने अपने माता-पिता को अत्यधिक कष्ट दिया और वेश्याओं के प्रभाव में आकर उनका अनादर किया। बाद में वेश्याओं ने उसका समस्त धन हड़पने के बाद उसकी भी हत्या कर दी, जिससे वह प्रेत योनि को प्राप्त हुआ।

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तपस्या के बाद जब गोकर्ण अपने गांव लौटे तो धुंधकारी ने प्रेत रूप में उन्हें अपनी व्यथा सुनाई। तब गोकर्ण ने उसके उद्धार का उपाय जानने के लिए सूर्यदेव से प्रार्थना की। सूर्यदेव ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से ही उसका उद्धार संभव है। इसके बाद गोकर्ण ने सात दिनों तक भागवत कथा का आयोजन किया। कथा श्रवण के लिए स्थापित बांस की सात गांठें प्रतिदिन एक-एक कर टूटती गईं और सातवें दिन कथा पूर्ण होने पर सभी गांठें टूट गईं। इसके साथ ही धुंधकारी को प्रेत योनि से मुक्ति मिल गई और भगवान विष्णु के पार्षद उसे वैकुंठ धाम ले गए।

कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने “राधे-राधे” के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कथा के समापन पर मुख्य यजमान सुभाष विश्वकर्मा एवं उनकी पत्नी विंध्यवासिनी देवी ने महाआरती की। इसके बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण किया गया।

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