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गोरखपुर

एंबुलेंस सेवाओं में फर्जीवाड़े का आरोप, कर्मचारियों के शोषण का मामला उजागर

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गोरखपुर। जनपद से एक गंभीर मामला सामने आ रहा है, जिसकी चर्चा पिछले कई दिनों से लगातार हो रही है। आरोप है कि एंबुलेंस संचालन और देखरेख में तैनात अधिकारियों की मिलीभगत से बड़े स्तर पर अनियमितताएं की जा रही हैं।

सूत्रों के अनुसार, RM दिग्विजय मौर्य के निर्देश पर EME सोनू शर्मा और EME शैलेश त्रिपाठी की कथित षड्यंत्रकारी मिलीभगत से एंबुलेंस कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है। इतना ही नहीं, आरोप यह भी है कि इनके इशारे पर पीसीआर रजिस्टर में फर्जी आधार कार्ड और फर्जी विवरण दर्ज कर “मुर्दों को जिंदा” दिखाकर फर्जी केस तैयार किए जा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि यह फर्जीवाड़ा जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों—जिला अस्पताल से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक—फैला हुआ है। आरोप के मुताबिक, एंबुलेंस कर्मचारियों (EMT और पायलट) पर दबाव बनाकर 108 एंबुलेंस पर प्रतिदिन 8 से 10 केस और 102 एंबुलेंस पर 20 से 25 केस दर्ज कराए जा रहे हैं, जिनमें कई मामलों में नाम, पता और आधार कार्ड तक फर्जी बताए जा रहे हैं।

इस पूरे मामले को लेकर राष्ट्रीय सूचनाधिकार एवं मानवाधिकार पर्यावरण संरक्षण संगठन के पदाधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाया है। संगठन का कहना है कि वह पत्राचार के माध्यम से इस पूरे प्रकरण की आधिकारिक शिकायत दर्ज कराकर जांच की मांग करेगा।

संगठन के अनुसार, इस संबंध में पहले भी जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के अधीक्षकों को कई बार अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।

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संगठन ने चेतावनी दी है कि इस फर्जीवाड़े में जो भी कर्मचारी, चाहे वह किसी भी स्तर का हो—नीचे से लेकर ऊपर तक—शामिल पाया जाता है, उसके खिलाफ संबंधित थाना, ब्लॉक और तहसील स्तर पर मुकदमा दर्ज कराया जाएगा और किसी को बख्शा नहीं जाएगा।

अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री के गृह जनपद में उठे इस गंभीर मामले पर प्रशासन कब तक संज्ञान लेता है और क्या जांच के बाद सच्चाई सामने आती है।

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