वाराणसी
म्यूल अकाउंट इस्तेमाल होने पर बैंक खाता हो सकता है फ्रीज, एसीपी साइबर की चेतावनी
पार्ट टाइम जॉब का झांसा देकर बेरोजगार युवकों के खातों का हो रहा इस्तेमाल
वाराणसी। आईपीएल (IPL) सट्टेबाजी और एपीके फाइल अपलोड का झांसा देकर साइबर ठगी करने वाले गिरोह के म्यूल अकाउंट पर साइबर क्राइम पुलिस की नजर बनी हुई है। साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने 250 से अधिक संदिग्ध बैंक खातों को चिन्हित किया है। इन खातों का इस्तेमाल मुख्य रूप से साइबर ठगी से हासिल रकम को ट्रांसफर करने और छिपाने के लिए किया जा रहा था। खातों में 5 से 6 करोड़ रुपये तक का लेनदेन हुआ।
मलिन बस्तियों और बेरोजगार युवकों को पार्ट टाइम जॉब का लालच देकर उनके बैंक खातों को म्यूल अकाउंट के रूप में उपयोग किया गया। साइबर क्राइम पुलिस के मुताबिक, डमी खातों का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। वाराणसी से लेकर गुजरात और लखनऊ तक 2000 से अधिक ऐसे डमी या फर्जी खाते संचालित हो रहे हैं, जिनका उपयोग साइबर अपराधी करोड़ों रुपये के लेनदेन में कर रहे हैं। बैंक अधिकारी, ट्राई और ईडी अधिकारी बनकर वीडियो कॉल और डिजिटल अरेस्ट के जरिए लोगों के खातों से लाखों रुपये उड़ाए जा रहे हैं। 10 मार्च 2026 को 8.38 लाख रुपये की ठगी करने वाले गिरोह को बंगाल से गिरफ्तार किया गया था, जो एपीके फाइल भेजकर बैंक खातों को खाली कर रहे थे।
मामले में बैंकों की मिलीभगत से भी इन्कार नहीं किया जा सकता, क्योंकि प्राइवेट बैंक में कार्यरत कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आ चुकी है। पूर्व में एचडीएफसी और आईसीआईसीआई बैंक के एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया जा चुका है, जो पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर 10 लाख रुपये से अधिक की ठगी में शामिल था।
एसीपी साइबर विदुष सक्सेना ने बताया कि यदि किसी का खाता म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल होता है तो उसका बैंक खाता फ्रीज (ब्लॉक) किया जा सकता है और उसे पुलिस जांच का सामना भी करना पड़ सकता है, भले ही वह अनजाने में इसमें शामिल हुआ हो।
बचाव और सतर्कता को लेकर एसीपी साइबर ने कहा कि अपना बैंक खाता, डेबिट-क्रेडिट कार्ड या चेकबुक किसी अनजान व्यक्ति को साझा न करें। घर बैठे पैसे कमाने या बैंक खाता किराये पर देने जैसे ऑफर से दूर रहें। यदि खाते में अचानक बड़ी रकम आती है और तुरंत निकाल ली जाती है, तो इसकी सूचना तुरंत बैंक को दें। साइबर फ्रॉड होने की स्थिति में तत्काल 1930 पर कॉल करें या एनसीआरपी पर शिकायत दर्ज कराएं।
साइबर अपराधी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे टेलीग्राम और फेसबुक या दोस्तों के माध्यम से लोगों को आसान कमाई और नौकरी का झांसा देकर उनके बैंक खाते, डेबिट कार्ड और चेकबुक किराये पर लेते हैं। ठगी की रकम सबसे पहले इन्हीं म्यूल अकाउंट में भेजी जाती है। इसके बाद रकम को दूसरे खातों या क्रिप्टो/यूएसडीटी में ट्रांसफर कर निकाल लिया जाता है, जिससे पुलिस के लिए मुख्य आरोपी तक पहुंचना कठिन हो जाता है। कई मामलों में अपराधी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भी बैंक खाते खुलवा लेते हैं।
