मिर्ज़ापुर
मिर्जापुर स्वास्थ्य विभाग में विवाद, दो डिप्टी CMO पर झोलाछापों को संरक्षण देने का आरोप
अधिवक्ता ने शासन को भेजा पत्र, दोनों अधिकारियों के तत्काल तबादले और निष्पक्ष जांच की मांग
मिर्जापुर। जिले के स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से तैनात दो डिप्टी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों के कामकाज को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। एक अधिवक्ता ने दोनों अधिकारियों पर गैर-चिकित्सकीय प्रैक्टिस करने वालों, कथित झोलाछाप डॉक्टरों और निजी चिकित्सकों को संरक्षण व लाभ पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य और अपर निदेशक चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को पत्र भेजकर दोनों अधिकारियों के तत्काल स्थानांतरण और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
शासन को पत्र भेजकर उठाए कई सवाल
अधिवक्ता ने अपने पत्र में जिले के स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और कथित अव्यवस्थाओं पर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि जिले में अवैध रूप से संचालित अस्पतालों, पैथोलॉजी सेंटरों और गैर-पंजीकृत चिकित्सकीय प्रैक्टिस करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। पत्र में दावा किया गया है कि कार्रवाई के बजाय कुछ लोगों को कथित तौर पर संरक्षण और लाभ पहुंचाया जा रहा है।
अवैध क्लीनिकों के संचालन पर भी सवाल
पत्र में आरोप लगाया गया है कि प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कथित रूप से अवैध क्लीनिक और चिकित्सा संस्थान संचालित हो रहे हैं। अधिवक्ता का कहना है कि इससे आम लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होने की आशंका बनी रहती है। अवैध अस्पतालों और झोलाछापों के खिलाफ शिकायत मिलने पर जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति किए जाने और मुख्य आरोपियों को बचाने का भी आरोप लगाया गया है।
दोनों डिप्टी CMO के तत्काल तबादले की मांग
अधिवक्ता ने शासन से मांग की है कि जनहित को ध्यान में रखते हुए दोनों डिप्टी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को मिर्जापुर से तत्काल स्थानांतरित किया जाए। साथ ही मामले की निष्पक्ष और गंभीर जांच कराकर आरोपों की सत्यता की जांच करने की मांग भी की गई है।
कार्रवाई न होने पर आंदोलन और कानूनी कदम की चेतावनी
पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि शासन स्तर से मामले का जल्द संज्ञान नहीं लिया गया और कथित अनियमितताओं पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो आगे कानूनी कदम उठाने के साथ आंदोलन भी किया जा सकता है। पत्र सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आया है। आरोपों की निष्पक्ष जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
