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गाजीपुर

बहरियाबाद में अवैध कोचिंग सेंटरों की बढ़ती संख्या से अभिभावक चिंतित

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मानकों की अनदेखी कर संचालित हो रहे शिक्षण संस्थान, छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप

मनमानी फीस, सुरक्षा व्यवस्था का अभाव और झूठे दावों पर उठे सवाल

बहरियाबाद (गाजीपुर)। बहरियाबाद और आसपास के बाजारों में अवैध रूप से संचालित कोचिंग सेंटरों एवं डिजिटल लाइब्रेरी की बढ़ती संख्या को लेकर अभिभावकों में चिंता बढ़ती जा रही है। क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि कई संस्थान निर्धारित मानकों की अनदेखी करते हुए छात्रों को शिक्षा देने के नाम पर मोटी फीस वसूल रहे हैं।

बिना मान्यता और आवश्यक योग्यताओं के चल रहे संस्थान

स्थानीय लोगों के अनुसार अनेक कोचिंग सेंटर ऐसे व्यक्तियों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं जिनके पास आवश्यक शैक्षणिक योग्यता या मान्यता नहीं है। आरोप है कि शिक्षा को व्यवसाय का रूप देकर छात्रों और अभिभावकों को आकर्षक दावों के माध्यम से प्रभावित किया जा रहा है।

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सुरक्षा मानकों की अनदेखी से बढ़ा हादसों का खतरा

क्षेत्र में संचालित अधिकांश कोचिंग सेंटर तंग गलियों और छोटे भवनों में चल रहे हैं, जहां अग्निशमन व्यवस्था, आपातकालीन निकास और अन्य सुरक्षा मानकों का अभाव देखा जा रहा है। कई स्थानों पर क्षमता से अधिक छात्रों को एक ही कमरे में बैठाया जाता है, जिससे किसी भी आपात स्थिति में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

100 प्रतिशत सफलता के दावों से अभिभावक परेशान

अभिभावकों का कहना है कि कुछ कोचिंग संस्थान छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं में शत-प्रतिशत सफलता दिलाने का दावा कर भारी-भरकम फीस वसूल रहे हैं। वहीं डिजिटल लाइब्रेरी के नाम पर भी विद्यार्थियों से मनमाना शुल्क लिया जा रहा है।

कार्रवाई की उठी मांग

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क्षेत्र के बुद्धिजीवियों और अभिभावकों ने प्रशासन से अवैध रूप से संचालित कोचिंग सेंटरों और डिजिटल लाइब्रेरी की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते ऐसे संस्थानों पर नियंत्रण नहीं किया गया तो छात्रों के भविष्य के साथ-साथ उनकी सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।

शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की जरूरत

स्थानीय लोगों का मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को नियमित निरीक्षण अभियान चलाना चाहिए। साथ ही मानकों को पूरा न करने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का वातावरण मिल सके।

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