गाजीपुर
बहन की गवाही बनी निर्णायक, हत्या के दोषी को अदालत ने सुनाई फांसी की सजा
गहमर क्षेत्र के चर्चित हत्याकांड में आया फैसला, 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया
गाजीपुर। जनपद के गहमर थाना क्षेत्र से जुड़े एक चर्चित हत्या मामले में न्यायालय ने अहम फैसला सुनाते हुए अभियुक्त को दोषी करार दिया है। प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शक्ति सिंह की अदालत ने अभियुक्त आजाद खां को हत्या का दोषी पाते हुए मृत्यु दंड (फांसी) की सजा सुनाई है।
2021 में हुई थी हत्या की घटना
अभियोजन पक्ष के अनुसार यह मामला अपराध संख्या 237/2021 एवं सत्र परीक्षण संख्या 248/22 से संबंधित है, जो भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दर्ज किया गया था। मामले के वादी अरमान खां थे। घटना 21 अक्टूबर 2021 की बताई गई है।
फांसी के साथ 50 हजार रुपये का जुर्माना
न्यायालय ने अपने आदेश में अभियुक्त पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। आदेश के अनुसार जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में अभियुक्त को छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। साथ ही अर्थदंड की पूरी राशि मृतक के वैध वारिसों को दिए जाने का निर्देश भी न्यायालय ने दिया है।
बहन की गवाही ने बदली मामले की दिशा
मामले की सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब मृतक की सगी बहन ने न्यायालय में सत्य के पक्ष में गवाही दी। अभियोजन पक्ष के अनुसार इस गवाही सहित अन्य साक्ष्यों ने घटना की परिस्थितियों को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अभियुक्त को दोषी माना।
शासकीय अधिवक्ता ने की प्रभावी पैरवी
मामले में शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता अखिलेश सिंह ने प्रभावी ढंग से पैरवी की। उनके द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और तर्कों को न्यायालय ने महत्वपूर्ण माना।
उच्च न्यायालय की पुष्टि के बाद लागू होगी सजा
कानूनी प्रावधानों के तहत किसी भी मृत्यु दंड के आदेश को लागू करने से पहले संबंधित उच्च न्यायालय से उसकी पुष्टि आवश्यक होती है। इसके बाद ही आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
न्यायालय के फैसले की क्षेत्र में चर्चा
फैसले के बाद क्षेत्र में इसकी व्यापक चर्चा है। स्थानीय लोग इसे न्याय व्यवस्था में साक्ष्य और सत्य के महत्व का उदाहरण बता रहे हैं। न्यायालय के इस निर्णय को कानून के शासन और निष्पक्ष न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
