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गोरखपुर

प्रो. अनुभूति दुबे ने संभाला ललित कला एवं संगीत विभागाध्यक्ष का कार्यभार

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प्रो. उषा सिंह को 28 वर्षों की सेवा के बाद शोधार्थियों ने दी संगीतमय विदाई

कुलपति ने नए नेतृत्व पर जताया भरोसा, विभाग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की उम्मीद

गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के ललित कला एवं संगीत विभाग में शुक्रवार को नेतृत्व परिवर्तन हुआ। प्रो. अनुभूति दुबे ने विभागाध्यक्ष का कार्यभार ग्रहण किया, जबकि निवर्तमान विभागाध्यक्ष प्रो. उषा सिंह को 28 वर्षों की शैक्षणिक सेवा के उपरांत शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने संगीतमय प्रस्तुतियों के बीच भावभीनी विदाई दी।

विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने प्रो. अनुभूति दुबे को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ललित कला एवं संगीत विभाग विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में विभाग शिक्षा, शोध, नवाचार तथा भारतीय कला एवं संगीत के संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल करेगा।

कार्यभार ग्रहण करने के बाद प्रो. अनुभूति दुबे ने कहा कि विभाग के शैक्षणिक और शोध विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने विद्यार्थियों के लिए कौशल आधारित और रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू करने, विभागीय पुस्तकालय को समृद्ध बनाने, डिजिटल संसाधनों का विस्तार करने तथा विभाग की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।

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समारोह में निवर्तमान विभागाध्यक्ष प्रो. उषा सिंह के योगदान को भी सराहा गया। उन्होंने लगभग 28 वर्षों तक विभाग की सेवा की, जिनमें 10 वर्ष विभागाध्यक्ष के रूप में शामिल हैं। एक प्रतिष्ठित सितार वादक के रूप में उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत, संगीत शिक्षा और शोध को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विदाई समारोह में शोधार्थियों और विद्यार्थियों की संगीतमय प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को भावुक बना दिया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक, कर्मचारी, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे। सभी ने प्रो. अनुभूति दुबे को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं और प्रो. उषा सिंह के दीर्घ एवं प्रेरणादायी शैक्षणिक योगदान की सराहना की।

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