गोरखपुर
पीएचडी शोधार्थियों के हित में नई व्यवस्था की तैयारी
डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय की बैठक में कई अहम फैसले, नौकरी मिलने पर भी शोध जारी रखने के लिए बनेगी नीति
कुलपति प्रो. पूनम टंडन बोलीं— गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, शोध और मूल्यांकन को मिलेगी नई दिशा
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय के सभी अधिष्ठाताओं, विभागाध्यक्षों, निदेशकों एवं अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में शोध, शिक्षण और परीक्षा प्रणाली से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक में पीएचडी शोधार्थियों के हित में नई व्यवस्था विकसित करने का निर्णय लिया गया। इसके तहत ऐसे शोधार्थियों, जिन्हें शोध कार्य के दौरान रोजगार या नौकरी प्राप्त हो जाती है, उनके लिए शोध कार्य को सुचारु रूप से जारी रखने की व्यवस्था तैयार की जाएगी। इस संबंध में विश्वविद्यालय अध्यादेश के विशेष प्रावधानों का अध्ययन कर आवश्यक दिशा-निर्देश तैयार करने के लिए एक समिति गठित की जाएगी। समिति अपनी संस्तुतियां प्रस्तुत करेगी, जिसके आधार पर आगे की नीति बनाई जाएगी।
बैठक में आगामी शैक्षणिक सत्र की परीक्षा प्रणाली पर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। विश्वविद्यालय ने तय किया है कि विषम सेमेस्टर की परीक्षाएं मुख्यतः वर्णनात्मक (Descriptive) पद्धति से आयोजित की जाएंगी। केवल बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQ) पर आधारित प्रणाली के बजाय विद्यार्थियों की विश्लेषणात्मक क्षमता, विषय की समझ और अभिव्यक्ति कौशल का समुचित मूल्यांकन करने के लिए वर्णनात्मक प्रश्नों को प्राथमिकता दी जाएगी।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों और शोधार्थियों के शैक्षणिक हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ऐसी नीतियां विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, शोध एवं मूल्यांकन प्रणाली को और अधिक सशक्त बनाएंगी। उन्होंने सभी अधिष्ठाताओं, विभागाध्यक्षों और अधिकारियों को इन निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में विश्वविद्यालय के सभी अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, निदेशक तथा संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
