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गाजीपुर

पितृ दिवस पर छलका पिता की यादों का दर्द : ब्रह्मानंद पांडेय

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पिता के संस्कार और सीख ही संतान की सबसे बड़ी विरासत

फादर्स डे पर स्वर्गीय पिता को याद कर भावुक हुए पूर्व सैनिक व समाजसेवी

भांवरकोल (गाजीपुर)। फादर्स डे के अवसर पर क्षेत्र के कनुवान गांव निवासी प्रख्यात समाजसेवी, पूर्व सैनिक एवं ब्राह्मण समाज के महासचिव पंडित ब्रह्मानंद पांडेय अपने स्वर्गीय पिता को याद कर भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि पिता का स्नेह, संरक्षण और मार्गदर्शन संतान के जीवन की सबसे बड़ी पूंजी होती है। पिता भले ही इस संसार से विदा हो जाएं, लेकिन उनके संस्कार, सीख और स्मृतियां जीवनभर साथ रहती हैं।

अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए श्री पांडेय ने बताया कि जब वह मात्र 17 वर्ष के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया था। आज 62 वर्ष की आयु में पहुंचने के बाद भी पिता की यादें उनके हृदय में उसी प्रकार जीवंत हैं। उन्होंने कहा कि पिता केवल परिवार के मुखिया नहीं होते, बल्कि पूरे परिवार की शक्ति, विश्वास और सुरक्षा के आधार होते हैं। उनके रहते जीवन की बड़ी से बड़ी कठिनाई भी छोटी प्रतीत होती है, लेकिन उनके जाने के बाद जीवन में ऐसा खालीपन आ जाता है, जिसे कभी भरा नहीं जा सकता।

श्मशान घाट से लौटते समय का दर्द आज भी है ताजा

भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि आज भी उन्हें वह दिन याद है, जब पिता की अंतिम यात्रा के बाद वह श्मशान घाट से लौट रहे थे। उस समय उन्हें बार-बार ऐसा महसूस हो रहा था कि पिताजी आवाज देकर कहेंगे, “रुको बेटा।” लेकिन चारों ओर केवल सन्नाटा था और आंखों में आंसुओं का सैलाब उमड़ रहा था। उन्होंने कहा कि वह पीड़ा आज भी उनके मन में ताजा है।

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हर कठिन परिस्थिति में याद आते हैं पिता के संस्कार

श्री पांडेय ने कहा कि समय के साथ जीवन आगे बढ़ जाता है, लेकिन पिता की कमी कभी समाप्त नहीं होती। जीवन के प्रत्येक महत्वपूर्ण निर्णय और कठिन परिस्थितियों में उन्हें अपने पिता की सीख और संस्कार याद आते हैं, जो आज भी उनका मार्गदर्शन करते हैं। उनके अनुसार पिता का आशीर्वाद और उनके द्वारा दिए गए संस्कार ही संतान की सबसे बड़ी विरासत होते हैं।

माता-पिता के सम्मान और सेवा का किया आह्वान

फादर्स डे के अवसर पर उन्होंने लोगों से अपने माता-पिता के प्रति सम्मान, प्रेम और सेवा का भाव रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के माता-पिता जीवित हैं, उन्हें उनके साथ अधिक से अधिक समय बिताना चाहिए तथा उनके त्याग और समर्पण का सम्मान करना चाहिए। माता-पिता का साया जीवन का सबसे बड़ा संबल होता है।

गौरतलब है कि फादर्स डे प्रत्येक वर्ष जून माह के तीसरे रविवार को मनाया जाता है। यह दिवस पिताओं के प्रेम, त्याग, समर्पण और परिवार के प्रति उनके अमूल्य योगदान को सम्मानित करने के लिए समर्पित है।

“पिता जीवन की वह छांव हैं, जिनकी कमी उम्रभर महसूस होती है, लेकिन उनके संस्कार हमेशा राह दिखाते रहते हैं।”

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