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वाराणसी

पांचवें दिन है स्कंदमाता के दर्शन का विधान, काशी के बागेश्वरी मंदिर में स्थित मां का दरबार

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रिपोर्ट – प्रदीप कुमार

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वाराणसी। काशी में नवरात्र में 9 गौरी के दर्शन भी किये जाते हैं। बागेश्वरी देवी गौरी स्वरूपा हैं। ऐसे में इनके दर्शन मात्र से गौरी और दुर्गा के दर्शन होते हैं और भक्तों को सुख समृद्ध की प्राप्ति होती है।
धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में नवरात्र पर्व की धूम है। नवरात्र के पांचवें दिन स्कंदमाता के दर्शन का विधान है। भक्त काशी के जैतपुरा स्थित बागेश्वरी देवी मंदिर में उमड़ रहे रहे हैं, जहां स्कंदमाता बागेश्वरी देवी के रूप में निवास करती हैं। काशी के इस प्राचीन मंदिर में स्कंदमाता के दर्शन को भक्त देर रात से ही लाइन लगा लेते हैं। इन्हे ज्ञान की देवी कहा जाता है। ऐसे में यहां आज के दिन छात्र-छात्राओं की अत्याधिक भीड़ होती है।
कार्तिकेय के जन्म के बाद पड़ा नाम स्कंदमाता।
मंदिर के महंत बागेश्वरी मिश्रा ने बताया कि आज नवरात्रि की पंचमी तिथि है और पुराणों में स्कंदमाता के दर्शन का विधान है। इस मंदिर में मां बागेश्वरी स्वरुप में विद्यमान हैं। भक्त मंगला आरती के बाद से दर्शन-पूजन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कार्तिकेय के जन्म के बाद माता का नाम स्कंदमाता पड़ा। इन्हे पीली वस्तु और कमल का फूल अतिप्रिय है।
ज्ञान की देवी है स्कंदमाता
उन्होंने बताया कि स्कंदमाता बागेश्वरी रूप में यहां विराजती हैं। आज उनकी गौरी स्वरुप बागेश्वरी और दुर्गा स्वरुप स्कंदमाता का दर्शन एक साथ होता है। उन्होंने बताया कि ये ज्ञान और विवेक की देवी हैं। इनके नित्य दर्शन मात्र से पढ़ाई में कमजोर बच्चों को यश और बुद्धि की प्राप्ति होती है।

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