बलिया
धान की बंपर पैदावार के लिए अपनाएं वैज्ञानिक तरीके : डॉ. रवि प्रकाश मौर्य
समय पर रोपाई, संतुलित उर्वरक और बेहतर जल प्रबंधन से बढ़ेगी उपज, किसानों को दी महत्वपूर्ण सलाह
बलिया (नरही)। खरीफ सीजन में धान की बेहतर पैदावार के लिए जुलाई का महीना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। कृषि विज्ञान केंद्र सोहांव के सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. रवि प्रकाश मौर्य ने किसानों को वैज्ञानिक तरीके अपनाने की सलाह देते हुए समय पर रोपाई और उचित फसल प्रबंधन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने घाघ की प्रसिद्ध कहावत का उल्लेख करते हुए कहा कि समय पर की गई रोपाई अच्छी उपज की आधारशिला होती है।

डॉ. मौर्य ने बताया कि धान की रोपाई के लिए 21 से 25 दिन की स्वस्थ पौध सबसे उपयुक्त रहती है। उन्होंने किसानों को कतार विधि से 20×15 सेंटीमीटर की दूरी पर रोपाई करने, प्रत्येक स्थान पर केवल दो से तीन पौधे लगाने तथा 3 से 4 सेंटीमीटर की गहराई बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि प्रति वर्ग मीटर लगभग 50 हिल (पौध समूह) होना बेहतर उत्पादन के लिए आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि मध्यम एवं देर से पकने वाली धान की किस्मों की रोपाई जुलाई के पहले पखवाड़े तक, अगेती किस्मों की 15 जुलाई के बाद तथा सुगंधित (बासमती) किस्मों की रोपाई जुलाई के अंतिम सप्ताह तक पूरी कर लेनी चाहिए।
खेत प्रबंधन पर जोर देते हुए डॉ. मौर्य ने कहा कि रोपाई से पहले खेत को अच्छी तरह समतल करें, मेड़ों की सफाई रखें तथा उन्हें मजबूत बनाएं। रोपाई के बाद खेत में लगभग 5 सेंटीमीटर पानी बनाए रखें और अधिक वर्षा होने पर जल निकासी की समुचित व्यवस्था करें, ताकि फसल को नुकसान न पहुंचे।
उन्होंने किसानों को मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करने तथा समय पर खरपतवार नियंत्रण करने की सलाह दी। उनके अनुसार वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर किसान धान की बेहतर गुणवत्ता और अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
