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बलिया

जन्मशताब्दी विशेष: सिद्धांतों की राजनीति के पुरोधा थे पूर्व मंत्री पं. काशीनाथ मिश्र

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30 जून को बलिया में होगा श्रद्धांजलि समारोह व सर्वदलीय विचार गोष्ठी, जनसेवा और मूल्यनिष्ठ राजनीति को किया जाएगा याद

बलिया। पूर्वांचल की राजनीति में सादगी, वैचारिक प्रतिबद्धता और जनसेवा की मिसाल रहे उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री पंडित काशीनाथ मिश्र की जन्मशताब्दी के अवसर पर 30 जून को टाउन हॉल (बापू भवन), बलिया में श्रद्धांजलि समारोह एवं सर्वदलीय विचार गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम का विषय “गांधी, नेहरू, लोहिया के विचार—सबके साथ पं. काशीनाथ” रखा गया है, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद, साहित्यकार, समाजसेवी और प्रबुद्ध नागरिक उनके व्यक्तित्व एवं योगदान पर अपने विचार रखेंगे।

छात्र राजनीति से शुरू हुआ सार्वजनिक जीवन

पंडित काशीनाथ मिश्र का जन्म 26 जून 1926 को बलिया जनपद के बेलहरी विकासखंड के डांगरबाद (गरया) गांव में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा गांव में तथा हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की शिक्षा राजकीय इंटर कॉलेज, बलिया से प्राप्त करने के बाद उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा ग्रहण की। वर्ष 1951 में वे विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। उस समय छात्रसंघ के उपाध्यक्ष रहे विश्वनाथ प्रताप सिंह बाद में देश के प्रधानमंत्री बने।

डॉ. लोहिया के सहयोगी से बने प्रदेश के कैबिनेट मंत्री

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छात्र जीवन में उनकी नेतृत्व क्षमता से प्रभावित होकर समाजवादी चिंतक डॉ. राममनोहर लोहिया ने उन्हें अपना निजी सहायक बनाया। वर्ष 1952 से 1962 तक उन्होंने समाजवादी विचारधारा के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 1962 में सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गए और समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश अध्यक्ष भी बने। इसी दौरान उन्होंने अनेक युवा नेताओं को समाजवादी आंदोलन से जोड़ा।

बाद में वर्ष 1972 में उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा। पुनः विधायक निर्वाचित होने के बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा की प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष बने। वर्ष 1980 में मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह तथा वर्ष 1982 में मुख्यमंत्री श्रीपति मिश्र के मंत्रिमंडल में उन्हें कैबिनेट मंत्री का दायित्व मिला।

मूल्यनिष्ठ राजनीति की विरासत को किया जाएगा याद

आयोजकों के अनुसार पंडित काशीनाथ मिश्र का सार्वजनिक जीवन गांधी, नेहरू और डॉ. राममनोहर लोहिया के आदर्शों पर आधारित राजनीति का प्रेरक उदाहरण रहा। उन्होंने सत्ता को जनसेवा का माध्यम मानते हुए सामाजिक समरसता, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनकल्याण को सदैव प्राथमिकता दी।

नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से जोड़ने का होगा प्रयास

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जन्मशताब्दी समारोह में उनके सिद्धांतों, आदर्शों और जनसेवा की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं, बल्कि मूल्याधारित राजनीति और लोकतांत्रिक आदर्शों के पुनर्स्मरण का भी महत्वपूर्ण अवसर होगा।

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