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वाराणसी

नशे की समस्या से मुक्ति आवश्यक महत्वपूर्ण है समाज की भूमिका – आयरन लेडी रीना सिंह

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नशीली दवाओं का दुरुपयोग और अवैध तस्करी पर लगे रोक

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जन संघ सेवक मंच और अंतरराष्ट्रीय मां विद्या ट्रस्ट महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेत्री आयरन लेडी रीना सिंह ने समाज में बढ़ रही नशे की लत पर चिंता व्यक्त करते हुए एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी को रोकने के लिए प्रत्येक वर्ष 26 जून को अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस मनाया जाता हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपने एक प्रस्ताव में 1989 से इसे मनाने का निर्णय लिया था। इसका उद्देश्य लोगों को नशे की बुरी आदत से छुटकारा दिलाना तथा उन्हें नशे से होने वाले दुष्प्रभाव से बचाना है।
मादक पदार्थों यानी नशे के सेवन की समस्या वैश्विक स्तर पर भयानक रूप से फैल चुकी है। इस वर्ष के अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस का विषय है- पीपुल फर्स्ट : स्टाप स्टिग्मा एंड डिस्क्रिमिनेशन, स्ट्रेंथेन प्रिवेंशन (कलंक एवं भेदभाव रोकें, रोकथाम बढ़ाएं)। नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी को रोकने के लिए प्रत्येक वर्ष 26 जून को अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस मनाया जाता हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपने एक प्रस्ताव में 1989 से इसे मनाने का निर्णय लिया था। इसका उद्देश्य लोगों को नशे की बुरी आदत से छुटकारा दिलाना तथा उन्हें नशे से होने वाले दुष्प्रभाव से बचाना है।
यह एक कटु सत्य है कि नशीले पदार्थों के सेवन से पीड़ित व्यक्ति को पारिवारिक एवं सामाजिक अलगाव और लोगों की उपेक्षा का सामना करना पड़ता है। इससे निश्चित रूप से उन्हें मानसिक और शारीरिक कष्ट एवं आघात पहुंचता है। वे आवश्यक मदद से भी वंचित रह जाते हैं। इससे उनका और उनके परिवार का जीवन दयनीय और कठिन बन जाता है। इसलिए नशीली दवाओं की लत से छुटकारा दिलाने की नीतियों में एक जन-केंद्रित सोच की आवश्यकता है, जो मानव अधिकारों और करुणा पर लक्षित हो।
मादक पदार्थों की चपेट में आए पीड़ितों की सामाजिक और भावनात्मक उपचार के साथ मदद करना और इनकी अवैध तस्करी के बढ़ते जाल के बारे में प्रभावी कदम उठाना एक मुश्किल कार्य है। देश को नशे की समस्या से मुक्त कराने के लिए एक सामूहिक प्रयास और समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता है। इस वर्ष का अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस मादक पदार्थों का उपयोग करने वालों एवं उनके परिवारों पर लगने वाले कलंक तथा भेदभाव के नकारात्मक प्रभाव के बारे में जागरूकता बढ़ाने पर केंद्रित है। नशा करने वाले लोगों में एड्स और हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारियां आम बात हैं। इस दिवस का एक अन्य उद्देश्य लोगों को इसकी जानकारी देने और इन रोगों की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों का विस्तार करना भी है। इसमें नशा करने वाले सभी लोगों को नशीली दवाओं के दुरुपयोग के विकारों, उपलब्ध उपचारों और सहायता के महत्व के बारे में शिक्षित करना भी शामिल है।
नशे की समस्या की भयावहता: यूएन ऑफिस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम (यूएनओडीसी) की वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट-2022 के अनुसार वर्ष 2020 में दुनिया भर में 15-64 आयु वर्ग के लगभग 28.40 करोड़ लोग नशीली दवाओं का उपयोग कर रहे थे, जो पिछले दशक की तुलना में 26 प्रतिशत अधिक है।
इस रिपोर्ट के अनुसार, युवा अधिक मादक दवाओं का उपयोग कर रहे हैं। कई देशों में इनका उपयोग पिछली पीढ़ी की तुलना में बढ़ गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार साल 2020 में दुनिया भर में 1.12 करोड़ लोग ड्रग्स के इंजेक्शन का उपयोग कर रहे थे। इनमें से आधे लोग हेपेटाइटिस सी से पीड़ित थे। 14 लाख एचआईवी से ग्रस्त थे। 12 लाख ऐसे थे, जो दोनों समस्याओं से पीड़ित थे। इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता है कि नशा एक गंभीर समस्या है, जो दुनिया भर में बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करती है।
वर्ष 2018 के दौरान नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर, गाजियाबाद द्वारा एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण आयोजित किया गया था। इससे भारत में मादक पदार्थों के उपयोग और रुझान के बारे में पता चला। इसके अनुसार, तब देश में 10 से 17 वर्ष की आयु के 6.06 प्रतिशत बच्चे और किशोर शराब, भांग, अफीम, इनहेलेंट, कोकीन और कई प्रकार के उत्तेजक एवं मतिभ्रम दवाओं के सेवन में लिप्त पाए गए थे। जबकि 18 से 75 वर्ष की आयु के वयस्कों में यह आंकड़ा 24.71 प्रतिशत था। देश में नशीली दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग को रोकने और लोगों को नशे की गंभीर समस्या से बाहर निकालने की हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि प्रत्येक हितधारक इस संबंध में किए जा रहे सरकारी प्रयासों में सहयोग करे तो इस समस्या से मुकाबला करना आसान हो जाएगा।
नशे के खिलाफ अभियान: नशे की समस्या से लड़ने के लिए केंद्र सरकार ने नशीली दवाओं की मांग में कमी के लिए एक योजना लागू की है, जिसके अंतर्गत लोगों को जरूरी शिक्षा देने, जागरूकता बढ़ाने, क्षमता निर्माण करने, कौशल विकास के लिए राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसी तरह 15 अगस्त, 2020 को नशा मुक्त भारत अभियान शुरू किया गया। इस अभियान में भारत के 272 जिलों को शामिल किया गया जिनमें 10 जिले हरियाणा के हैं। इसके तहत महिलाओं, बच्चों, शैक्षणिक संस्थानों, नागरिक संगठनों आदि जैसे हितधारकों की भागीदारी पर विशेष जोर दिया जाता है।
देखा जाए तो मादक पदार्थों के दुरुपयोग से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से यही सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। इस अभियान के तहत अब तक जमीनी स्तर पर की गई विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से 12 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंचा जा चुका है। इसके अलावा चार हजार से अधिक युवा मंडल, नेहरू युवा केंद्र और एनएसएस स्वयंसेवक भी इस अभियान से जुड़े हुए हैं। एक बड़े समुदाय तक पहुंचने में आंगनबाड़ी केंद्रों, आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, महिला मंडलों और महिला स्व-सहायता समूहों की दो करोड़ से अधिक महिलाओं का योगदान भी महत्वपूर्ण रहा है।
नशा मुक्त भारत अभियान के तहत देश भर में अब तक 1.19 लाख से अधिक शैक्षणिक संस्थानों ने छात्रों एवं युवाओं को मादक द्रव्यों के सेवन से पैदा होने वाली समस्याओं के बारे में शिक्षित करने के लिए गतिविधियां आयोजित की हैं। मादक पदार्थों की लत को जड़ से समाप्त करने के लिए स्वापक औषधि एवं मन: प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (1985 का केंद्रीय अधिनियम-61) के अंतर्गत नियम अधिसूचित किए गए हैं।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग, भारतीय रेड क्रास सोसायटी की प्रदेश एवं जिला स्तरीय संस्थाएं, राज्य बाल परिषद की संस्थाएं एवं स्वैच्छिक संस्थाओं द्वारा नशामुक्ति केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। मेडिकल कालेजों में स्थापित नशा मुक्ति एवं परामर्श केंद्रों के माध्यम से भी इस बीमारी को जड़ से समाप्त करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इसके अलावा मादक पदार्थों के दुरुपयोग की रोकथाम के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वालों को पुरस्कार भी दिया जाता है।
साफ है देश में नशेखोरी की समस्या से निपटने और पीड़ितों के पुनर्वास के लिए बहुत कुछ किया जा रहा है। हालांकि इतने भर से हमें आत्मसंतुष्ट नहीं हो जाना चाहिए। लोगों को मादक पदार्थों के सेवन से रोकने और उन्हें बचाने के लिए सभी हितधारकों को और अधिक प्रेरित करने की आवश्यकता है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को अवैध दवा आपूर्ति शृंखला, मादक द्रव्य आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए।
विशेष रूप से बड़े शहरों और सीमाई क्षेत्रों में मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में एक प्रभावी निगरानी तंत्र खड़ा करने के लिए पुलिस बलों सहित केंद्र और राज्य सरकारों की सभी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय महत्वपूर्ण साबित होगा। अक्सर हम संपन्न, संभ्रांत और मध्यम वर्ग के परिवारों के बच्चों को पब में प्रतिबंधित पदार्थों का सेवन करते हुए पकड़े जाने के बारे में पढ़ते और सुनते हैं। इसके लिए लाइसेंसिंग की प्रक्रिया को सख्त किया जाना चाहिए। ऐसी संस्थाओं के लाइसेंस रद करने में भी तेजी लाई जानी चाहिए।
एक कल्याणकारी राज्य की जिम्मेदारी होती है कि वह अपने नागरिकों को शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रखे। एक स्वस्थ एवं समृद्ध राष्ट्र के निर्माण के लिए उसके नागरिकों का स्वस्थ होना आवश्यक है, लेकिन यह तभी संभव है जब राज्य अपने नागरिकों को उचित स्वास्थ्य उपलब्ध कराने के लिए नशे की समस्या पर लगाम कसेगा। यह किसी से छिपा नहीं है कि बिगड़ते स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी हद तक मादक पदार्थों का सेवन जिम्मेदार है जिससे देश में हर वर्ष लाखों लोगों की मौत हो रही है।
नशे की समस्या की रोकथाम में समाज एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। समाज को आगे आकर मादक पदार्थों और इनके आपूर्तिकर्ताओं का बहिष्कार करना चाहिए। इसके लिए एक सामाजिक तंत्र विकसित किया जाना चाहिए। माता-पिता और अभिभावकों को भी सलाह दी जानी चाहिए कि वे अपने बच्चों और युवाओं के साथ कैसे व्यवहार करें और उन्हें नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खतरे से दूर रखने के लिए क्या उपाय करें। मादक पदार्थों के उपयोग के खिलाफ लड़ाई में मजबूत पारिवारिक मूल्य शक्तिशाली अस्त्र साबित हो सकते हैं।
इसी तरह हमें मादक पदार्थों के सेवन और उनके दुष्परिणामों के बारे में लोगों के बीच जागरूकता फैलाने के लिए व्यापक डिजिटल सामग्री का भी विकास करना चाहिए। हम पाठ्यपुस्तकों और फिल्मों के माध्यम से भी युवाओं और वयस्कों को नशीली दवाओं के जाल में पड़ने के विरुद्ध जागरूक कर सकते हैं। मादक पदार्थों का सेवन रोकने के साथ-साथ हमें इसके पीड़ितों के पुनर्वास के लिए भी एक संपूर्ण दृष्टिकोण अपनाना होगा। उन्हें सामाजिक रूप से अलग-थलग करने के बजाय हमें उनके प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए और उनकी मदद करनी चाहिए, ताकि वे अपनी गलतियों का अहसास कर सकें और सामान्य जीवन में लौट सकें। स्वस्थ, समृद्ध और शांतिपूर्ण भविष्य के लिए नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खतरे को समाप्त करने का यह सही समय है।

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