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वाराणसी

श्री कृष्ण उत्सव सेवा समिति एवं वाराणसी केराना व्यापार समिति द्वारा श्रीमद्भागवत कथा का चतुर्थ दिवस

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रिपोर्ट – प्रदीप कुमार

श्रीमद्भागवत कथा का चतुर्थ दिवस
कलियुग में भगवान से बड़ा उनका नाम, उससे भी बड़ा कर्म प्रभु पर आस्था, विश्वास और भरोसा ही सर्वोच्च

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वाराणसी। श्री कृष्ण उत्सव सेवा समिति एवं वाराणसी केराना व्यापार समिति द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन रामकटोरा स्थित चिन्तामणी बाग में प्रसिद्ध कथाकार लक्ष्मी मणी शास्त्री ने सभी श्रद्धालु श्रोताओं को सुनाया कि कलियुग में नाम का बड़ा महत्व है, प्रभु के नाम से भी जरूरी है – विश्वास और भरोसा । हमारे शरीर में चौदह लोक हैं- अस्थि पर्वत है, रोम वृक्ष है, नसों में बहती हुयी धारा नदी एवं छिद्र गुफा है। कथा व्यास जी ने नाम के महत्व को बताते हुए कहा कि मात्र 5 वर्ष के बालक ध्रुव को मात्र पाँच माह के अन्दर छत्तीस हजार वर्ष तक राज करने सहित ध्रुव तारा बनने का वरदान प्राप्त हुआ, जिसकी परिक्रमा आज भी सप्तऋषियों द्वारा होती रहती है। कथा में महाराज जी ने बाल हठ, राज हठ, स्त्री हठ के कथाओं का वर्णन बहुत सुंदर ढंग से किया। अन्य कथाओं में भगवान द्वारा सच्चे हृदय से पुकारने पर गजेन्द्र को मोक्ष दिलाया। भगवान के वामन अवतार की कथा एवं रामजन्म सहित भगवान के अन्य अवतारों का वर्णन किया। अंत में भगवान के पूर्ण अवतार श्री कृष्ण के प्राकट्य का बहुत सुंदर व भावपूर्ण प्रसंगों द्वारा प्रस्तुत किया गया। श्रद्धा की अविरल धारा प्रांगण में बह रही थी, श्रद्धालु झूमते नाचते कथा श्रवण – करते हुए आनन्द में भावविभोर रहे।
मुख्य यजमान गणेश प्रसाद कसेरा, सुशीला देवी और अध्यक्ष अशोक कसेरा सहित 11 बालिकाओं द्वारा आरती के बाद माखन मिश्री सहित श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण किया गया। स्वागत एवं सम्मान कलाधर गुरू द्वारा किया गया। व्यवस्था में अशोक कसेरा, अनिल कसेरा, विनोद कसेरा, सुवाष मिश्रा, अरूण कसेरा, भईया लाल, शिवम कसेरा आदि ने सहयोग किया। आज की प्रसाद सेवा मनोज कुमार सिंह, संजय कसेरा, अरूण कसेरा, सत्यम कसेरा की तरफ से किया गया।

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