चन्दौली
संसाधन होने के बावजूद बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण, छह दिनों से हाहाकार
नल सूखे पड़े, निजी नलकूपों के भरोसे ग्रामीण; शिकायतों के बाद भी जलापूर्ति बहाल नहीं, धरना-प्रदर्शन की चेतावनी
सकलडीहा (चंदौली)। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच सकलडीहा क्षेत्र में पेयजल संकट ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। क्षेत्र के ग्रामीण पिछले छह दिनों से बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं। हैरानी की बात यह है कि गांव में पेयजल आपूर्ति के पर्याप्त संसाधन मौजूद होने के बावजूद ग्रामीणों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। लगातार छह दिनों से नलों में पानी नहीं आने के कारण लोगों में जिम्मेदार विभाग के प्रति भारी आक्रोश है।
ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल संकट शुरू होने के बाद उन्होंने संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों से कई बार शिकायत की। समस्या को लेकर मौखिक और लिखित रूप से भी जानकारी दी गई, लेकिन अब तक जलापूर्ति बहाल नहीं हो सकी है। ग्रामीणों के मुताबिक अधिकारी समस्या के समाधान का आश्वासन तो दे रहे हैं, लेकिन मौके पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
निजी नलकूपों के सहारे बुझ रही प्यास
पिछले छह दिनों से नल सूखे पड़े हैं। ऐसे में ग्रामीणों को अपनी जरूरत का पानी जुटाने के लिए दूसरे खेतों में लगे निजी नलकूपों का सहारा लेना पड़ रहा है। लोगों को दूर जाकर पानी लाना पड़ रहा है, जिससे रोजमर्रा के काम भी प्रभावित हो रहे हैं। वहीं कस्बे के लोगों को आसपास रहने वाले लोगों से पीने का पानी मांगकर काम चलाना पड़ रहा है।
पानी की किल्लत का सबसे अधिक असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है। घर की महिलाओं और बच्चों को पानी जुटाने और ढोने में काफी समय लग रहा है। भीषण गर्मी और उमस के बीच पेयजल संकट ने ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ा दी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब पानी की आपूर्ति के लिए संसाधन उपलब्ध हैं तो इसके बावजूद छह दिनों तक समस्या का बने रहना जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। लोगों ने जल्द से जल्द जलापूर्ति व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की है।
जलापूर्ति नहीं हुई तो धरना-प्रदर्शन
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पेयजल आपूर्ति बहाल नहीं की गई तो वे तहसील मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जलापूर्ति शुरू कराने की मांग की है, ताकि लोगों को भीषण गर्मी में पानी के लिए भटकना न पड़े।
