भदोही
आधुनिक तकनीक से संकर टमाटर की खेती ने बदली किसान की तस्वीर
एक हेक्टेयर में 275 से 350 क्विंटल उत्पादन, डेढ़ लाख लागत के बाद करीब 3.50 लाख रुपये की शुद्ध आय
जौनपुर। परंपरागत खेती के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री और विशेषज्ञों के तकनीकी मार्गदर्शन को अपनाकर किसान खेती को लाभ का बेहतर माध्यम बना सकते हैं। विकासखंड जौनपुर के ग्राम भिडिउरा निवासी किसान कैलाशपति दूबे पुत्र लालता प्रसाद ने उद्यान विभाग के मार्गदर्शन में संकर टमाटर की खेती कर इसका सफल उदाहरण प्रस्तुत किया है।
कैलाशपति दूबे ने एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में संकर टमाटर की खेती शुरू की। उद्यान विभाग के योजना प्रभारी धर्मेंद्र कुमार मौर्य से समय-समय पर मिले तकनीकी मार्गदर्शन के आधार पर उन्होंने गुणवत्तापूर्ण पौध तैयार कर खेत में रोपण किया। फसल की बेहतर वृद्धि और उत्पादन के लिए उन्होंने मल्चिंग, ड्रिप सिंचाई और स्टेकिंग तकनीक को अपनाया।
फसल की पूरी अवधि में उद्यान विभाग की सलाह के अनुसार आवश्यक उर्वरकों का प्रयोग किया गया। साथ ही कीट एवं रोगों से फसल की सुरक्षा के लिए जरूरी उपाय किए गए। किसान ने नियमित रूप से फसल की देखभाल की और आधुनिक तकनीकों का समुचित इस्तेमाल किया, जिसका परिणाम बेहतर उत्पादन के रूप में सामने आया।
डेढ़ लाख की लागत में बेहतर मुनाफा
किसान कैलाशपति दूबे के अनुसार एक हेक्टेयर क्षेत्रफल से करीब 275 से 350 क्विंटल संकर टमाटर का उत्पादन प्राप्त हुआ। खेती में लगभग 1.50 लाख रुपये की लागत आई, जबकि फसल से करीब 3.50 लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई। बेहतर आमदनी से किसान की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और खेती के प्रति उनका उत्साह भी बढ़ा।
कैलाशपति दूबे ने बताया कि उद्यान विभाग से मिली तकनीकी सलाह और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने से उन्हें बेहतर परिणाम मिले। ड्रिप सिंचाई से पानी का बेहतर प्रबंधन हुआ, जबकि मल्चिंग से खेत की नमी बनाए रखने में मदद मिली। स्टेकिंग तकनीक से पौधों की उचित देखभाल और फसल प्रबंधन भी आसान हुआ।
अन्य किसान भी हो रहे प्रेरित
कैलाशपति दूबे की सफलता को देखकर गांव के अन्य किसान भी आधुनिक कृषि तकनीकों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। स्थानीय कृषकों में संकर टमाटर की वैज्ञानिक एवं तकनीकी खेती को लेकर रुचि बढ़ी है।
किसान की सफलता यह संदेश देती है कि आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञों की सलाह और लगातार मेहनत को खेती से जोड़कर उत्पादन बढ़ाने के साथ अच्छी आमदनी भी हासिल की जा सकती है। उद्यान विभाग के तकनीकी सहयोग ने भी इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
