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भदोही

ललही छठ आज, संतान की दीर्घायु के लिए माताएं रखेंगी व्रत

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द्वापर युग से जुड़ा है हलषष्ठी का महत्व, भगवान बलराम को समर्पित है पर्व

ज्ञानपुर। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला हलछठ पर्व आज श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। इसे हलषष्ठी, ललई छठ और ललही छठ के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के ज्येष्ठ भ्राता बलराम को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए व्रत रखती हैं।

आचार्य महेंद्रनाथ मिश्र के अनुसार हलछठ का संबंध द्वापर युग से माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से पहले शेषनाग ने बलराम के रूप में जन्म लिया था। भगवान बलराम को हलधर भी कहा जाता है और उनका प्रमुख अस्त्र हल था। इसी कारण इस पर्व का नाम हलषष्ठी पड़ा। नवविवाहिताएं और माताएं विशेष रूप से इस व्रत को संतान के कल्याण और दीर्घायु की कामना से करती हैं।

देवकी से जुड़ी है व्रत की प्राचीन कथा

आचार्य महेंद्रनाथ मिश्र ने बताया कि हलषष्ठी व्रत की कथा का उल्लेख प्राचीन धार्मिक परंपराओं में मिलता है। मान्यता के अनुसार यह कथा नारद जी ने भगवान श्रीकृष्ण की माता देवकी को सुनाई थी। देवकी ने इस व्रत को किया और संतान की रक्षा के लिए इसकी महत्ता को जाना।

महाभारत काल से जुड़ी एक अन्य मान्यता के अनुसार अश्वत्थामा के प्रहार से उत्तरा का गर्भ नष्ट हो गया था। इसके बाद युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से गर्भ की रक्षा के उपाय के बारे में पूछा। तब श्रीकृष्ण ने हलषष्ठी व्रत की महत्ता बताई। मान्यता है कि उत्तरा द्वारा व्रत किए जाने के प्रभाव से नष्ट हुआ गर्भ पुनर्जीवित हुआ और बाद में बालक का जन्म हुआ, जो आगे चलकर राजा परीक्षित के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

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पूजा के बाद विशेष आहार से व्रत का पारण

हलषष्ठी के दिन महिलाएं विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। पूजा के बाद भैंस के दूध से बने दही और महुआ को पलाश के पत्ते पर ग्रहण कर व्रत का समापन करने की परंपरा बताई गई है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस व्रत के प्रभाव से व्रती को धन, ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

पर्व को लेकर महिलाओं में विशेष उत्साह है। माताएं और नवविवाहिताएं संतान के मंगल और परिवार की सुख-शांति के लिए श्रद्धापूर्वक हलषष्ठी व्रत करेंगी।

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