गोरखपुर
‘टेस्ट ऑफ उत्तर प्रदेश’ में छाईं बाटीपुर की संचालिका रिया पाण्डेय
पारंपरिक स्वाद को आधुनिक पहचान देने की पहल को मिली सराहना
स्थानीय व्यंजनों को पर्यटन, रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने पर हुआ मंथन
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों और क्षेत्रीय खानपान को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से आयोजित ‘टेस्ट ऑफ उत्तर प्रदेश’ कार्यक्रम में बाटीपुर रेस्टोरेंट की संचालिका रिया पाण्डेय की सहभागिता आकर्षण का केंद्र रही। पूर्वांचल के पारंपरिक स्वाद को आधुनिक प्रस्तुति और व्यावसायिक दृष्टिकोण से जोड़ने की उनकी पहल को अतिथियों, खाद्य विशेषज्ञों और उद्यमियों ने सराहा।
स्थानीय व्यंजनों की ब्रांडिंग पर जोर
कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जनपदों के पारंपरिक व्यंजनों, स्थानीय खाद्य उत्पादों, पौष्टिकता, गुणवत्ता, ब्रांडिंग और पर्यटन की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि उत्तर प्रदेश का प्रत्येक क्षेत्र अपने विशिष्ट स्वाद और खानपान के लिए जाना जाता है। बेहतर पैकेजिंग, प्रचार और आधुनिक विपणन के माध्यम से इन व्यंजनों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा सकता है।
पूर्वांचल की भोजन संस्कृति को दे रहीं नई पहचान
रिया पाण्डेय ने कहा कि बाटीपुर रेस्टोरेंट के माध्यम से पूर्वांचल की पारंपरिक भोजन संस्कृति को संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका मानना है कि मिट्टी की सौंधी खुशबू और घर-आंगन के स्वाद से जुड़े व्यंजनों को आधुनिक परिवेश में प्रस्तुत कर नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने पारंपरिक स्वाद की मौलिकता बनाए रखते हुए स्वच्छता, गुणवत्ता और आकर्षक प्रस्तुति पर विशेष जोर दिया।

‘एक जनपद-एक व्यंजन’ से बढ़ेंगे अवसर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री कमलेश पासवान ने कहा कि ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ जैसी अवधारणा स्थानीय व्यंजनों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के साथ रोजगार, उद्यमिता और पर्यटन को भी नई दिशा दे सकती है। वहीं दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने पारंपरिक खानपान को शोध, तकनीक और नवाचार से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम में होटल व्यवसायियों, खाद्य उद्यमियों, शेफ, रेस्तरां संचालकों और विभिन्न फूड ब्रांडों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। पारंपरिक व्यंजनों के संरक्षण और खाद्य क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया गया। आयोजन में स्थानीय भोजन को प्रदेश की संस्कृति, पहचान और आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया गया।
