मिर्ज़ापुर
‘युद्ध नहीं, बुद्ध की आवश्यकता’— बोधि पथ कार्यशाला में पर्यावरण संरक्षण का संदेश
अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान की सप्तदिवसीय कार्यशाला में बुद्ध के मध्यम मार्ग और सतत विकास पर हुआ मंथन
पर्यावरण संरक्षण को बताया समय की सबसे बड़ी आवश्यकता, जनजागरूकता पर दिया गया जोर
मीरजापुर। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सप्तदिवसीय ‘बोधि पथ कार्यशाला–2026’ का आयोजन के.बी. डिग्री कॉलेज के बीएड विभाग में किया गया। कार्यशाला में बुद्ध के विचारों, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्य अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष लालबहादुर सरोज ने कहा कि बौद्ध धर्म का मध्यम मार्ग और अहिंसा का सिद्धांत आधुनिक सतत विकास के लक्ष्यों के सबसे निकट है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध के उपदेश पेड़ों, नदियों और वन्य जीवों के संरक्षण का संदेश देते हैं, जो वर्तमान समय में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग ही पर्यावरण संरक्षण की कुंजी है।
विशिष्ट अतिथि एवं नगर पालिका अध्यक्ष श्याम सुंदर केसरी ने कहा कि आज के समय में “युद्ध नहीं, बुद्ध की आवश्यकता है।” उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने और प्रत्येक व्यक्ति से प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में प्राचार्य प्रो. रविंद्र कुमार द्विवेदी, प्रो. बीना देवी सिंह, माँ विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय के कुल सचिव रामनारायण, परीक्षा नियंत्रक हरिश्चंद्र, विभूति कुमार मिश्रा, प्रो. नम्रता मिश्रा, प्रो. भवभूति मिश्रा, प्रो. भानु प्रताप सिंह तथा प्रो. इंदु भूषण द्विवेदी सहित अनेक शिक्षाविद एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यशाला में विषय पर बीज वक्तव्य डॉ. रविंद्र प्रताप सिंह ने प्रस्तुत किया, जबकि कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन डॉ. कुलदीप पांडे ने किया। आयोजकों ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य बौद्ध दर्शन के माध्यम से समाज में पर्यावरण संरक्षण, शांति और मानवीय मूल्यों के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना है।
