बलिया
युवा शक्ति का सही नियोजन देश के लिए वरदान बन सकता है: डॉ. गणेश पाठक
विश्व जनसंख्या दिवस पर बोले शिक्षाविद्— बढ़ती आबादी चुनौती भी, अवसर भी; कौशल विकास और रोजगार पर दिया जोर
बलिया। विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. गणेश पाठक ने “जनसंख्या वृद्धि: खतरे की घंटी या संसाधन का आधार” विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि बढ़ती जनसंख्या सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय चुनौतियां उत्पन्न कर रही है, लेकिन यदि इसका प्रभावी नियोजन किया जाए तो यही जनसंख्या देश के लिए सबसे बड़ी मानव संपदा बन सकती है।
डॉ. पाठक ने बलिया जनपद के संदर्भ में जनसंख्या के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 1901 में जिले की आबादी 9,89,420 थी, जो वर्ष 2011 में बढ़कर 32,39,774 हो गई। इस अवधि में जिले की जनसंख्या में लगभग 195.88 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। उन्होंने बताया कि विभिन्न अनुमानों के अनुसार वर्ष 2021 में जिले की आबादी लगभग 35.63 लाख (कुछ अध्ययनों के अनुसार 37.17 लाख) तथा वर्ष 2024 में करीब 38.37 लाख होने का अनुमान है।
उन्होंने कहा कि जनसंख्या वृद्धि के कारण भोजन, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी मूलभूत आवश्यकताओं पर दबाव बढ़ रहा है। बेरोजगारी में वृद्धि होने से युवाओं के भटकने और अपराध तथा नशाखोरी जैसी सामाजिक समस्याओं के बढ़ने की आशंका भी बढ़ जाती है।
डॉ. पाठक ने कहा कि भारत विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश है। यदि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो यही युवा देश की सबसे बड़ी ताकत साबित हो सकते हैं। उन्होंने कृषि आधारित लघु, कुटीर एवं मध्यम उद्योगों के विकास पर विशेष बल देते हुए कहा कि इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित होंगे और गांवों से शहरों की ओर पलायन भी कम होगा।
उन्होंने कहा कि समय रहते बढ़ती जनसंख्या को मानव संसाधन के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस प्रयास नहीं किए गए तो इसका सामाजिक और आर्थिक ढांचे पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। वहीं, सुनियोजित नीति और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से यही जनसंख्या देश के विकास की सबसे बड़ी शक्ति बन सकती है।
