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वाराणसी

सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में निबंध लेखन प्रतियोगिता आयोजित

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44वें दीक्षान्त समारोह की पूर्ववर्ती गतिविधियों में विद्यार्थियों ने दिखाई रचनात्मक प्रतिभा

प्रो. विद्या कुमारी चंद्रा बोलीं- रचनात्मक लेखन से विकसित होती है राष्ट्रीय चेतना और नेतृत्व क्षमता

वाराणसी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के 44वें दीक्षान्त समारोह की पूर्ववर्ती गतिविधियों के तहत मंगलवार को योग साधना केन्द्र में निबंध लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों और विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया और समसामयिक विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

प्रतियोगिता दोपहर 2 बजे शुरू हुई। इसमें प्रत्येक संबद्ध महाविद्यालय से दो-दो प्रतिभागियों के साथ विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता के लिए “भारत विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था कैसे बना” और “राज्य सरकार के दो अच्छे कार्य” विषय निर्धारित किए गए थे।

विद्यार्थियों ने तथ्यों, तर्कों और मौलिक चिंतन के आधार पर अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रतिभागियों ने राष्ट्रीय विकास, आर्थिक प्रगति और शासन व्यवस्था से जुड़े विषयों पर अपनी समझ और लेखन क्षमता का प्रदर्शन किया।

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निबंध लेखन से व्यक्तित्व का होता है विकास

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. विद्या कुमारी चंद्रा ने कहा कि निबंध लेखन केवल भाषा का अभ्यास नहीं, बल्कि विचारों को दिशा देने और व्यक्तित्व को निखारने का माध्यम है।

उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों में तार्किक चिंतन, राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक जिम्मेदारी, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास करते हैं। विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान करना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले जागरूक और संवेदनशील नागरिक तैयार करना है।

शिक्षकों ने बढ़ाया प्रतिभागियों का उत्साह

कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुमिता ने किया। वेद विभाग के डॉ. सत्येन्द्र कुमार यादव ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए अतिथियों, शिक्षकों, प्रतिभागियों और आयोजन समिति के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर डॉ. रविशंकर पाण्डेय, डॉ. ज्ञानेन्द्र सापकोटा, सुश्री नीलिमा चौबे, आदित्य कुमार सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक मौजूद रहे। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को निरंतर अध्ययन, चिंतन और रचनात्मक गतिविधियों से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया।

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