गाजीपुर
संपूर्ण समाधान दिवस से ग्रामीणों को मिल रहा त्वरित न्याय
एक ही मंच पर हो रहा समस्याओं का निस्तारण
भूमि विवाद से लेकर बिजली, पेंशन और पुलिस मामलों तक की शिकायतों का हो रहा समाधान
बहरियाबाद (गाजीपुर)। उत्तर प्रदेश सरकार की जनहितकारी पहल ‘संपूर्ण समाधान दिवस’ ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए समस्याओं के त्वरित और पारदर्शी निस्तारण का प्रभावी माध्यम बनता जा रहा है। बहरियाबाद एवं आसपास के गांवों के लोगों का कहना है कि इस व्यवस्था से वर्षों से लंबित मामलों के समाधान में तेजी आई है और उन्हें अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं।
पूर्व में तहसील दिवस के नाम से आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम का दायरा बढ़ाते हुए इसे संपूर्ण समाधान दिवस नाम दिया गया। इसका आयोजन प्रत्येक माह के प्रथम और तृतीय शनिवार को तहसील स्तर पर किया जाता है, जिसमें जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, उपजिलाधिकारी समेत विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहकर लोगों की शिकायतें सुनते हैं।
इस व्यवस्था के तहत राजस्व, पुलिस, बिजली, समाज कल्याण, पंचायत, स्वास्थ्य, लोक निर्माण तथा अन्य विभागों से संबंधित शिकायतें एक ही स्थान पर दर्ज की जाती हैं। शिकायत दर्ज होने पर आवेदक को एक यूनिक शिकायत संख्या दी जाती है और संबंधित अधिकारी मामले की सुनवाई कर आवश्यक निर्देश जारी करते हैं। सरल मामलों का निस्तारण मौके पर ही कर दिया जाता है, जबकि जांच की आवश्यकता वाले मामलों के लिए संयुक्त टीम गठित कर समयबद्ध रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जाते हैं।
संपूर्ण समाधान दिवस में भूमि विवाद, अवैध कब्जा, पैमाइश, वरासत, राशन कार्ड, पेंशन, आवास योजना, बिजली संबंधी समस्याएं, पुलिस शिकायतें, सड़क, नाली, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामलों का भी निस्तारण किया जाता है।
शासन स्तर पर भी शिकायतों की नियमित निगरानी की जाती है। मुख्यमंत्री कार्यालय और वरिष्ठ अधिकारी पोर्टल के माध्यम से लंबित एवं निस्तारित मामलों की समीक्षा करते हैं। लापरवाही या गलत रिपोर्ट देने वाले अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह व्यवस्था प्रशासन और जनता के बीच की दूरी कम करने के साथ-साथ सरकारी तंत्र को अधिक जवाबदेह और संवेदनशील बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
