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वाराणसी

वाराणसी: आईपीएल सट्टे के नाम पर 700 करोड़ की साइबर ठगी की जांच तेज2000 से अधिक बैंक खातों और क्रिप्टो ट्रांजैक्शन की हो रही पड़ताल

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साइबर क्राइम थाना ने संभाली जांच

वाराणसी। आईपीएल में सट्टा लगाने के नाम पर सोशल मीडिया के जरिए लोगों से कथित तौर पर करीब 700 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले की जांच अब तेज कर दी गई है। यह मामला क्राइम ब्रांच से साइबर क्राइम थाना स्थानांतरित किया गया है, जहां विशेषज्ञों की टीम बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और क्रिप्टो ट्रांजैक्शन की जांच में जुटी है।

2000 से अधिक बैंक खातों से हुआ लेनदेन

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कथित ‘मलिक फर्म’ के माध्यम से 2000 से अधिक बैंक खातों में बड़े पैमाने पर धन का लेनदेन किया गया। जांच एजेंसियों को आशंका है कि रकम को विभिन्न खातों में ट्रांसफर करने के बाद क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित कर विदेश, विशेषकर खाड़ी देशों, तक भेजा गया। हवाला नेटवर्क के इस्तेमाल की भी जांच की जा रही है।

30 दिनों में 25 करोड़ रुपये का ट्रांजैक्शन

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साइबर क्राइम पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी रितेश दिवाकर शुक्ला समेत 13 आरोपियों के बैंक खातों की जांच में केवल 30 दिनों के भीतर लगभग 25 करोड़ रुपये के लेनदेन का पता चला है। जांच में यह भी सामने आया कि मई माह में 300 से अधिक बैंक खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर की गई थी।

टेलीग्राम के जरिए लोगों को बनाया जाता था शिकार

पुलिस के अनुसार, टेलीग्राम चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों को आईपीएल सट्टे और निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर धन जमा कराया जाता था। इसके बाद रकम को अलग-अलग खातों में भेजकर डिजिटल माध्यम से आगे ट्रांसफर किया जाता था।

छापेमारी में 13 आरोपी गिरफ्तार

1 जून को कैंट पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई में टकटकपुर स्थित एक अपार्टमेंट से 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने उनके कब्जे से लगभग एक करोड़ रुपये मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी भी बरामद की थी।

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पूछताछ में पता चला कि आरोपियों को मुंबई में कथित तौर पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने वाराणसी सहित अन्य क्षेत्रों में नेटवर्क तैयार किया।

रियल एस्टेट और हवाला कनेक्शन की भी जांच

जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि ठगी से अर्जित धन का इस्तेमाल हवाला नेटवर्क और रियल एस्टेट परियोजनाओं में निवेश के लिए किया गया या नहीं। लखनऊ, वाराणसी और कानपुर समेत कई शहर जांच के दायरे में हैं।

पुलिस रिमांड में होगी पूछताछ

एसीपी साइबर विदुष सक्सेना के अनुसार, आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी। जांच का उद्देश्य पूरे नेटवर्क, कथित विदेशी कनेक्शन, बैंक खातों, क्रिप्टो वॉलेट और धन के वास्तविक प्रवाह का पता लगाना है।

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पुलिस का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर इस अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और वित्तीय लेनदेन के संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।

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