गाजीपुर
मुगलपुरा के कदीमी ताजिया पर उमड़ी अकीदतमंदों की भीड़, देर रात तक गूंजती रहीं ‘या हुसैन’ की सदाएं
शिया समुदाय ने पारंपरिक अंदाज में मनाया मुहर्रम, मजलिस व मातम में बड़ी संख्या में शामिल हुए सोगवार
पुलिस रही मुस्तैद, सबीलों पर ठंडे पानी की व्यवस्था; गंगा-जमुनी तहजीब की दिखी खूबसूरत मिसाल
गाजीपुर। नवासा-ए-रसूल हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के 72 शहीदों की याद में मनाया जा रहा मुहर्रम का पर्व गाजीपुर शहर के पूर्वी क्षेत्र में पूरी अकीदत और गमगीन माहौल के बीच मनाया जा रहा है। इसी क्रम में ऐतिहासिक मोहल्ला मुगलपुरा के मुख्य चौक पर शिया समुदाय द्वारा कदीमी ताजिया को पारंपरिक रीति-रिवाज और पूरे एहतराम के साथ मसनद पर जलवा अफरोज़ किया गया। ताजिया के दीदार और जियारत के लिए देर रात तक अकीदतमंदों का तांता लगा रहा।
मजलिस के दौरान काले लिबास में सोगवारों की अंजुमनों ने सीनाज़नी करते हुए पुरदर्द नौहे और मरसिए पढ़े तथा बारगाह-ए-हुसैन में अपनी अकीदत पेश की। मसनद को काले एवं चांदी की गोटेदार मखमली कपड़ों से सजाया गया था, जबकि शमों और मोतिया की खुशबूदार लड़ियों ने पूरे माहौल को रूहानी बना दिया।
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार मुगलपुरा की यह कदीमी परंपरा कई सदियों पुरानी है और मुगलकाल से चली आ रही है। यहां आयोजित होने वाली मजलिसों में पढ़े जाने वाले पारंपरिक नौहे और मरसिए आज भी इस ऐतिहासिक विरासत को जीवंत बनाए हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह ताजिया केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि गाजीपुर की सांस्कृतिक विरासत और गंगा-जमुनी तहजीब का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मुहर्रम के दौरान जिला प्रशासन के निर्देश पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल पूरी रात संवेदनशील स्थानों और जुलूस मार्गों पर तैनात रहा। स्थानीय वालंटियर्स के सहयोग से पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
भीषण गर्मी और उमस को देखते हुए मोहल्लावासियों ने विभिन्न स्थानों पर सबील लगाकर अकीदतमंदों के लिए ठंडे पानी एवं शरबत की व्यवस्था की। देर रात तक “या हुसैन” की सदाओं से पूरा मुगलपुरा क्षेत्र गूंजता रहा।
