वाराणसी
मत्स्य आधारित समेकित कृषि प्रणाली से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
कृषि विज्ञान केंद्र में पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का दूसरा दिन संपन्न
मिर्जामुराद (वाराणसी)। क्षेत्र के कल्लीपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित मत्स्य आधारित समेकित कृषि प्रणाली मॉडल पर आधारित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन बुधवार को किसानों को आधुनिक कृषि, मत्स्य पालन एवं पशुपालन की उन्नत तकनीकों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वाराणसी मंडल के उपनिदेशक मत्स्य सुरेश कुमार रहे।

समेकित कृषि प्रणाली किसानों के लिए लाभकारी
कार्यक्रम का शुभारंभ कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. नवीन कुमार सिंह द्वारा मुख्य अतिथि का अंगवस्त्र भेंटकर स्वागत करने के साथ हुआ। उन्होंने कहा कि मत्स्य आधारित समेकित कृषि प्रणाली छोटे एवं सीमांत किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। किसान कम लागत में कृषि, मत्स्य पालन और पशुपालन को एक साथ अपनाकर बेहतर आमदनी प्राप्त कर सकते हैं।
सरकारी योजनाओं की दी जानकारी
मुख्य अतिथि सुरेश कुमार ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र एवं प्रदेश सरकार मत्स्य क्षेत्र के विकास के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, निषाद राज बोट योजना तथा मत्स्य पालक कल्याण योजना के तहत उपलब्ध अनुदान, बीमा, तालाब निर्माण, मत्स्य बीज, फीड और अन्य सुविधाओं की विस्तार से जानकारी दी।
एक एकड़ मॉडल से 5 लाख तक की आय संभव
प्रशिक्षण समन्वयक एवं प्रसार वैज्ञानिक डॉ. राहुल कुमार सिंह ने एक एकड़ के मत्स्य आधारित समेकित कृषि मॉडल की जानकारी देते हुए बताया कि इसमें मत्स्य पालन, बकरी पालन, मुर्गी पालन, वर्मी कम्पोस्ट, सब्जी एवं फल उत्पादन को शामिल कर किसान प्रतिवर्ष लगभग 3.5 से 5 लाख रुपये तक शुद्ध आय अर्जित कर सकते हैं।
विशेषज्ञों ने साझा किए तकनीकी सुझाव
कार्यक्रम में शस्य वैज्ञानिक डॉ. अमितेश कुमार सिंह ने वर्मी कम्पोस्ट निर्माण की वैज्ञानिक विधि पर प्रकाश डाला। वहीं डॉ. पूजा सिंह ने बकरी एवं मुर्गी पालन की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी। श्रीप्रकाश सिंह ने प्राकृतिक खेती और समेकित कृषि प्रणाली की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की।
किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का उद्देश्य
प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रक्षेत्र प्रबंधक राणा पियूष, देवमणि विश्वकर्मा सहित 25 किसान प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को कम लागत वाले बहुआयामी कृषि मॉडल से जोड़कर आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
