बलिया
काला दिवस आज: लोकतंत्र पर काला अध्याय, आपातकाल की 51वीं बरसी पर होगा लोकतंत्र सेनानी सम्मान
1975 के आपातकाल को बताया गया लोकतंत्र पर काला अध्याय
बलिया। लोकबन्धु राजनारायण की चुनाव याचिका पर आए फैसले के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा 25 जून 1975 को देश में लगाए गए आपातकाल को लोकतंत्र पर काला अध्याय बताया गया। लोकतंत्र सेनानियों ने इसे भारतीय राजनीति की सबसे विवादित घटनाओं में से एक करार दिया।
बलिया में विरोध और गिरफ्तारियों का दौर
आपातकाल के दौरान पूरे देश के साथ बलिया जनपद में भी विरोध की लहर देखने को मिली थी। उस समय विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं की बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां की गईं। 26 जून से जिले में लोकदल, जनसंघ एवं छात्र-युवा संघर्ष समिति के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और विरोध प्रदर्शन शुरू किया।
प्रशासन द्वारा आंदोलन को दबाने के प्रयास में कई प्रमुख नेताओं को जेल भेजा गया। जनपद कारागार में अनेक लोकतंत्र सेनानी बंद रहे, जिन्होंने उस दौर में संघर्ष और प्रतिरोध का इतिहास रचा।
51वीं बरसी पर लोकतंत्र सेनानियों का कार्यक्रम
लोकतंत्र सेनानी संगठन ने आपातकाल की 51वीं बरसी पर 25 जून को सुबह 10 बजे शहीद पार्क चौक पर कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की है। इस अवसर पर लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान भी किया जाएगा।
संगठन की अपील
संगठन के प्रवक्ता संतोष कुमार शुक्ल ने सेनानियों, बुद्धिजीवियों एवं आमजन से कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता करने की अपील की है।
