बलिया
बात मनवाने का नया माध्यम बने टॉवर और पानी की टंकियां
बलिया में बढ़ रही खतरनाक प्रवृत्ति, जान जोखिम में डालकर मांगें मनवाने की कोशिश
बांसडीह (बलिया)। जिले में पारिवारिक विवाद, प्रेम-प्रसंग और व्यक्तिगत मांगों को लेकर लोगों द्वारा मोबाइल टॉवर और पानी की टंकियों पर चढ़ने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। यह प्रवृत्ति अब प्रशासन और समाज दोनों के लिए चिंता का विषय बन गई है।
ताजा मामला: युवक टॉवर पर चढ़ा, चार घंटे चला हाई-वोल्टेज ड्रामा
उत्तर टोला निवासी धनजी वर्मा (30) पारिवारिक प्रताड़ना और चोरी का मुकदमा दर्ज न होने से नाराज होकर अंबेडकर तिराहे के पास स्थित एक मोबाइल टॉवर पर चढ़ गया। उसने टॉवर से ‘एक बड़े बेटे का दर्द’ लिखी सैकड़ों पर्चियां नीचे फेंकी, जिससे मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने करीब साढ़े चार घंटे तक समझाने का प्रयास किया। अंततः एसपी के निर्देश पर परिजनों के खिलाफ मामला दर्ज कर एफआईआर की कॉपी युवक को मोबाइल पर भेजी गई, जिसके बाद वह सुरक्षित नीचे उतर आया। बाद में पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।
बढ़ती घटनाओं का पैटर्न
जिले में पिछले तीन महीनों के दौरान यह चौथी ऐसी घटना सामने आई है, जहां लोगों ने अपनी मांगों को मनवाने के लिए जान जोखिम में डालकर टॉवर या टंकी का सहारा लिया है। पहले भी प्रेम-प्रसंग, शादी और पारिवारिक विवादों से जुड़ी घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
हाल की प्रमुख घटनाएं
सुखपुरा क्षेत्र में एक युवती प्रेमी से शादी कराने की मांग को लेकर टॉवर पर चढ़ गई थी। बाद में दोनों परिवारों की सहमति से विवाह संपन्न कराया गया।
19 अप्रैल: बात कराने की जिद
देवड़ीह (बांसडीह) में एक किशोर किशोरी से बात कराने की मांग को लेकर बिजली के टॉवर पर चढ़ गया था। पुलिस ने उसे सुरक्षित नीचे उतारा और बाद में मामला दर्ज किया गया।
21 अप्रैल: प्रेम विवाह की मांग
नगरा थाना क्षेत्र में एक युवक अपनी प्रेमिका से शादी कराने की मांग को लेकर ऊंचे विद्युत टॉवर पर चढ़ गया था। घंटों की मशक्कत के बाद उसे नीचे उतारा गया।
2 मई: प्रेम प्रसंग का मामला
बैरिया क्षेत्र में एक युवती प्रेमी को बुलाने की जिद में टॉवर पर चढ़ गई थी, जिसे बाद में परिजनों ने समझाकर नीचे उतारा।
विशेषज्ञ की राय
जिला अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. अनुष्का सिन्हा के अनुसार टॉवर या टंकी पर चढ़कर मांग मनवाना अत्यंत खतरनाक प्रवृत्ति है। इसमें करंट, गिरने और गंभीर चोट का खतरा रहता है। साथ ही मौके पर भीड़ बढ़ने से स्थिति और अधिक संवेदनशील हो जाती है।
चिंता का विषय बनी प्रवृत्ति
लगातार बढ़ रही ऐसी घटनाएं प्रशासन के लिए चुनौती बनती जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस प्रवृत्ति पर रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में गंभीर हादसों की आशंका और बढ़ सकती है।
