वाराणसी
वाराणसी में भगवान जगन्नाथ के रथ को मिलेगा स्थायी देवालय 50 लाख की लागत से बन रही 45 फीट ऊंची भव्य रथशाला, वर्षभर होंगे दर्शन
50 लाख की लागत से बन रही 45 फीट ऊंची भव्य रथशाला, वर्षभर होंगे दर्शन
काशी की ऐतिहासिक रथयात्रा परंपरा को मिलेगा नया स्वरूप
वाराणसी| की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा अब एक नए अध्याय में प्रवेश करने जा रही है। सदियों पुरानी इस परंपरा को और अधिक भव्य और स्थायी स्वरूप देने के लिए सिगरा स्थित रथशाला परिसर में भगवान जगन्नाथ के रथ हेतु एक भव्य स्थायी देवालय का निर्माण कराया जा रहा है। इसके पूर्ण होने के बाद श्रद्धालु वर्षभर भगवान के रथ के दर्शन कर सकेंगे।
50 लाख की लागत से तैयार होगी आधुनिक रथशाला
श्री जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट और नगर निगम के संयुक्त सहयोग से लगभग 50 लाख रुपये की लागत से इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण किया जा रहा है।
ट्रस्ट के सचिव शैलेष त्रिपाठी के अनुसार रथशाला के पिलरों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और आगामी दो से तीन महीनों में निर्माण कार्य पूर्ण होने की उम्मीद है।
मंदिर जैसी होगी रथशाला की भव्य संरचना
निर्माणाधीन रथशाला को पारंपरिक मंदिर वास्तुकला के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। इसकी प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं—
रथशाला की प्रमुख विशेषताएं
- लगभग 45 फीट ऊंची आधुनिक थ्रीडी रथशाला
- शीर्ष पर 11 फीट ऊंचा भव्य शिखर
- भीतर स्थापित होगा 18 फीट ऊंचा अष्टकोणीय रथ
- **22 फीट ऊंचा विशाल प्रवेश द्वार
- प्रवेश द्वार पर 5 फीट ऊंचा पारदर्शी शीशा, जिससे राहगीर भी बाहर से दर्शन कर सकेंगे वर्षभर होगी भगवान के रथ की पूजा-अर्चना
अब तक भगवान जगन्नाथ का रथ मुख्य रूप से रथयात्रा के दौरान ही दर्शन के लिए उपलब्ध होता था। नई व्यवस्था के तहत रथ की 365 दिन नियमित पूजा-अर्चना की जाएगी।
इसके लिए एक स्थायी पुजारी की नियुक्ति की जाएगी, जो प्रतिदिन पूजा-पाठ के साथ रथशाला की देखरेख और स्वच्छता की जिम्मेदारी भी निभाएगा।
234 वर्षों पुरानी परंपरा का संरक्षण
काशी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की परंपरा लगभग 234 वर्षों से चली आ रही है। इस परंपरा की शुरुआत वर्ष 1802 में हुई थी, जबकि अस्सी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर का निर्माण 1792 में कराया गया था।
हर वर्ष निकलने वाली यह रथयात्रा काशी की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं।
16 जुलाई से शुरू होगा ऐतिहासिक रथयात्रा मेला
इस वर्ष भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा का शुभारंभ 16 जुलाई से होगा। काशी के प्रसिद्ध लक्खा मेलों की शुरुआत भी इसी रथयात्रा मेले से मानी जाती है।
पुरी की तर्ज पर काशी में भी भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की रथयात्रा बड़े धार्मिक उत्साह के साथ निकाली जाती है। इस दौरान हजारों श्रद्धालु रथ खींचकर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
नई रथशाला के निर्माण से श्रद्धालुओं को पूरे वर्ष भगवान जगन्नाथ के रथ के दर्शन का अवसर मिलेगा। इससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए काशी में एक नया धार्मिक आकर्षण विकसित होगा।
यह परियोजना न केवल भगवान जगन्नाथ के ऐतिहासिक रथ की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि काशी की प्राचीन धार्मिक विरासत को संरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
विशेष बात
रथशाला के पूर्ण होने के बाद भगवान जगन्नाथ का ऐतिहासिक रथ पहली बार वर्षभर दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए उपलब्ध रहेगा, जिससे काशी की धार्मिक परंपराओं को नई पहचान मिलेगी।
