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जौनपुर

मोहर्रम का पारंपरिक जुलूस अकीदत के साथ निकला

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नौहाख्वानी और मातम में शामिल हुए अज़ादार, शहीदाने कर्बला को दी गई श्रद्धांजलि

जौनपुर। मोहर्रम की दूसरी तारीख पर हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी हुसैनिया मीरघर से पारंपरिक जुलूस श्रद्धा, अनुशासन और अकीदत के साथ निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में अज़ादारों ने हिस्सा लेकर हजरत इमाम हुसैन और शहीदाने कर्बला की याद में मातम एवं नौहाख्वानी की।

कार्यक्रम की शुरुआत सोजख्वानी से हुई, जिसकी निजामत सैय्यद सज्जाद नकी ने की। जनाब तहसीन और उनके हमनवाओं ने दर्दभरे अंदाज में सोजख्वानी प्रस्तुत कर माहौल को गमगीन बना दिया।

कर्बला के संदेश पर डाला प्रकाश

इसके बाद आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए सैय्यद शाहिद हुसैन ने कर्बला के संदेश, त्याग, बलिदान और इंसानियत की रक्षा के लिए इमाम हुसैन की कुर्बानियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कर्बला का संदेश हर दौर में सत्य, न्याय और मानवता की रक्षा के लिए प्रेरणा देता है।

शबीहे अलम, ताबूत और जुल्जनाह का निकला जुलूस

मजलिस के उपरांत शबीहे अलम, शबीहे ताबूत और शबीहे जुल्जनाह का जुलूस बरामद हुआ। जुलूस के दौरान अज़ादारों ने पूरी अकीदत के साथ मातम किया। अंजुमन ज़ुल्फ़ेकरिया बड़ी मस्जिद के सदस्यों ने नौहाख्वानी और सीना-जनी कर शहीदाने कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।

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सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद

जुलूस मार्ग पर शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। कार्यक्रम के आयोजक सैय्यद हसन अब्बास ने प्रशासन और पुलिस विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सहयोग से आयोजन शांतिपूर्ण एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

उन्होंने बताया कि यह पारंपरिक जुलूस अपने 65वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है और क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। जुलूस में बड़ी संख्या में अज़ादार, गणमान्य नागरिक तथा समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल रहे।

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