भदोही
सुदामा चरित्र की कथा के साथ भागवत कथा को विराम
भगवान अपने प्रभाव से नहीं, बल्कि स्वभाव से होते हैं पूज्य : पं. प्रमोद शास्त्री
रैमलपुर-भदोही। क्षेत्रीय गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के विश्राम दिवस पर कथा व्यास पं. प्रमोद शास्त्री ने सुदामा चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान अपने प्रभाव से नहीं, बल्कि अपने स्वभाव से पूज्य होते हैं। भगवान श्रीकृष्ण का प्रभाव जगविदित है। वह असुरों का क्षणभर में विनाश कर सकते हैं और विराट रूप धारण कर अर्जुन का मोह भी भंग कर सकते हैं, लेकिन भक्तों के प्रति उनका स्वभाव और भी अद्भुत है।
पं. प्रमोद शास्त्री ने कहा कि श्रीकृष्ण अपने भक्तों का स्वयं सम्मान करते हैं और अयाचक को भी सर्वस्व प्रदान कर देते हैं। सुदामा जी द्वारा प्रेमपूर्वक अर्पित दो मुट्ठी चूड़ा (चावल) के बदले भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें दो लोक की संपत्ति प्रदान कर दी। सुदामा चरित्र भगवान और भक्त के बीच प्रेम, समर्पण और आत्मीयता का संदेश देता है।
कथा के दौरान दत्तात्रेय चरित्र का भी वर्णन किया गया। पं. प्रमोद शास्त्री ने कहा कि संसार में हर व्यक्ति और वस्तु से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। इसलिए सभी को अपने से श्रेष्ठ समझते हुए जीवन में अच्छे गुणों को ग्रहण करना चाहिए।
इसके बाद नवयोगेश्वरों की कथा में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का विस्तार से वर्णन किया गया। कथा के अंतिम चरण में परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाई गई। हरि नाम संकीर्तन के साथ श्रीमद्भागवत कथा का विश्राम हुआ।
इस अवसर पर संतोष पाठक, विनोद, प्रमोद, नरेंद्र, शैलेंद्र, वीरेंद्र पाठक सहित पुरोहित रमाशंकर दूबे, सोमेश्वर दूबे, नारायण दास, लोकनाथ मिश्र आदि मौजूद रहे।
