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आजमगढ़

साहित्यिक उपलब्धियों पर प्रोफेसर अखिलेश चन्द्र को मिला सारस्वत सम्मान

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महाविद्यालय ने भेंट की साहित्यकार की कुर्सी

आजमगढ़। गांधी पीजी कॉलेज मालटारी, आजमगढ़ में शिक्षा संकाय के प्रोफेसर अखिलेश चन्द्र को उनकी साहित्यिक उपलब्धियों के लिए “सारस्वत सम्मान” से नवाजा गया। यह सम्मान प्राचार्य सुचिता श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में दिया गया। उन्होंने कहा कि अखिलेश चन्द्र 29 वर्षों से साहित्य सेवा में निरंतर सक्रिय हैं।

उनकी कहानी ‘अनकही’ 2016 में मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी की मासिक पत्रिका ‘साक्षात्कार’ में प्रकाशित हुई थी और हाल ही में ‘रिक्शावाला’ श्रृंखला गत देवब्रत समाचार में 4 व 6 मई 2025 को छपी, जो पूरे महाविद्यालय के लिए गर्व का विषय है।कार्यक्रम के संयोजक प्रोफेसर प्रशान्त कुमार राय ने बताया कि ‘हंसूली’ कहानी के लेखन के दौरान वे स्वयं विषय वस्तु और शीर्षक पर लगातार संवाद में रहे हैं।

यह कहानी अब तक 24 बार राष्ट्रीय स्तर पर मंचित हो चुकी है। उन्होंने आगे के लेखन के लिए शुभकामनाएं दीं।हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर हसीन खान ने कहा कि अखिलेश की कहानियां आमजन की संवेदनाओं से जुड़ी होती हैं। ‘पलायन’ कहानी में एक बकरी के माध्यम से किसान परिवार की व्यथा को मार्मिक ढंग से चित्रित किया गया है।

उनका कहानी संग्रह ‘अनकही’ 2018 में प्रकाशित हुआ था, जिसका दूसरा संस्करण 2024 में आया। इसमें कुल 11 कहानियां हैं, जिन पर देशभर में चर्चा चल रही है। साथ ही उनकी कविता संग्रह ‘सहचर मन’ और यूट्यूब पर उनके गीत काफी लोकप्रिय हैं।

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‘हंसूली’ कहानी पर आधारित लेख ‘आजमगढ़ की हंसूली’ लिखकर नादरंग पत्रिका के संपादक आलोक पराड़कर ने उन्हें राष्ट्रीय फलक पर स्थापित किया। इसी क्रम में महाविद्यालय परिवार ने उन्हें ‘साहित्यकार की कुर्सी’ भेंट की जो आगे भी प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

बीएड विभागाध्यक्ष कैलाश नाथ गुप्ता ने कहा कि अखिलेश चन्द्र विज्ञान के विद्यार्थी होते हुए भी हिंदी साहित्य में अपनी सशक्त पहचान बना चुके हैं। भूगोल विभागाध्यक्ष शैलेश कुमार सिंह ने ‘रिक्शावाला’ कहानी को समाज में संवेदना बचाए रखने वाला बताया।

डॉ. जगदीश कुमार ने ‘चंद्रकला’ और ‘अखिल आई हेट यू’ जैसी कहानियों की सराहना करते हुए उन्हें प्रेमचंद की लेखनी की झलक बताया। लेफ्टिनेंट चंदन कुमार ने ‘इंतजार’ और ‘अनकही’ को अत्यंत संवेदनात्मक बताया और कन्या भ्रूण हत्या जैसे मुद्दों पर लेखक की दृष्टि को सराहा।

समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष राजेश कुमार यादव ने ‘फूलवाली’ कहानी को पढ़ने के बाद लेखक की रचनात्मकता की प्रशंसा की। कर्मचारी संघ के अध्यक्ष राजेन्द्र यादव ने उन्हें एक संपूर्ण व्यक्तित्व बताया और उनके योगदान को महाविद्यालय के लिए गर्व का विषय बताया।

कार्यालय अधीक्षक उपेन्द्र कुमार राय ने कहा कि प्रोफेसर अखिलेश चन्द्र सुख-दुख में सदैव साथ खड़े रहते हैं। उन्होंने उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।अपने सम्मान पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रोफेसर अखिलेश चन्द्र ने कहा कि उन्हें कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मान मिला है, लेकिन अपने महाविद्यालय द्वारा दिया गया यह सम्मान उन्हें अभिभूत कर गया।

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उन्होंने अपनी प्रेरणा का श्रेय अपनी पत्नी गीता सिंह को दिया, जो डीएवी पीजी कॉलेज में हिन्दी विभाग की अध्यक्ष हैं और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ‘शिक्षक श्री पुरस्कार 2017’ से सम्मानित हो चुकी हैं।

इस अवसर पर प्रेम चन्द्र यादव, दान बहादुर यादव, अनंत कुमार त्रिपाठी, मनोज कुमार गौतम, दुर्गेश गौतम, संदीप यादव, दीनानाथ मिश्रा, नित्यानंद यादव, जनार्दन राय, दिव्यांशु मिश्रा, जय प्रकाश यादव, राम बचन यादव, उर्मिला, सुमित्रा, पिंकू, विजय कुमार शर्मा सहित महाविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों ने बधाई और शुभकामनाएं दीं।

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