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गोरखपुर

बेसहारा हुए पत्रकारों को जगी उम्मीद

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वेतन, ग्रेच्युटी और सेवा सुरक्षा को लेकर उप श्रमायुक्त के समक्ष सुनवाई, निर्णय सुरक्षित

गोरखपुर। वर्षों से वेतन, ग्रेच्युटी और सेवा सुरक्षा की पीड़ा झेल रहे राष्ट्रीय सहारा एवं सहारा समय टीवी चैनल के पत्रकारों और कर्मचारियों के मामले में सोमवार को किसी भी स्तर पर प्रत्यक्ष वार्ता नहीं हुई। श्रमायुक्त कार्यालय (डीएलसी) में पक्ष और विपक्ष की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं के माध्यम से सुनवाई संपन्न हुई, जिसके बाद उप श्रमायुक्त शक्ति सेन मौर्य ने मामले में निर्णय सुरक्षित रख लिया है। मंगलवार की शाम तक इस प्रकरण में महत्वपूर्ण फैसला आने की संभावना जताई गई है।

सुनवाई के दौरान डीएलसी परिसर में 100 से अधिक पत्रकार और कर्मचारी मौजूद रहे। सभी ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए एकजुटता और आपसी सद्भाव का संदेश दिया। वर्षों से अलग-अलग संघर्ष झेल रहे पत्रकार इस मौके पर एक मंच पर खड़े दिखाई दिए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे पत्रकार समुदाय के सम्मान और अधिकार की है।

पत्रकारों और कर्मचारियों ने बताया कि वर्षों तक वे अपनी पीड़ा किसी से कह नहीं सके। पत्रकारिता के स्वाभिमान और जिम्मेदारी के चलते वे चुपचाप आर्थिक संकट सहते रहे और अपने तथा बच्चों के जीविकोपार्जन के लिए संघर्ष करते रहे। दूसरों के दर्द को आवाज देने वाले पत्रकार अपने ही घर की तकलीफ किसी से साझा नहीं कर पाए। हालात तब सामने आए, जब उनसे इस्तीफा देने की बात कही गई।

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कर्मचारियों का कहना है कि वे 30 से 35 वर्षों से संस्था से जुड़े हैं और वर्ष 2013 से अब तक उन्हें नियमित व पूरा वेतन नहीं मिला। कई बार केवल चार–पांच माह का भुगतान हुआ, तो कभी आंशिक राशि देकर काम चलाया गया। इसके बावजूद उन्होंने संस्था के प्रति अपनी निष्ठा नहीं छोड़ी। अब जब बिना लिखित आदेश के सेवा समाप्ति की चर्चा सामने आई, तो यह उनके जीवन और बच्चों के भविष्य से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन गया।

सुनवाई के दौरान पत्रकारों और कर्मचारियों की ओर से अधिवक्ताओं ने बकाया वेतन, ग्रेच्युटी, पीएफ और अन्य वैधानिक देयों का मुद्दा मजबूती से रखा। उप श्रमायुक्त ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित रखते हुए कहा कि मामले का निस्तारण कानून के दायरे में रहकर किया जाएगा।

पत्रकारों और कर्मचारियों को उम्मीद है कि मंगलवार शाम तक आने वाला फैसला वर्षों से बेसहारा हो चुके पत्रकारों के लिए न्याय, सम्मान और भविष्य की सुरक्षा का रास्ता खोलेगा।

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