गाजीपुर
बहरियाबाद में अकीदत के साथ मनाया गया चेहल्लुम
मजलिस, नौहाख्वानी और मातमी कार्यक्रमों में उमड़े अकीदतमंद, इमाम हुसैन की शहादत को किया याद
बहरियाबाद/गाजीपुर। बहरियाबाद तथा आसपास के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में बुधवार को चेहल्लुम का पर्व अकीदत और गमगीन माहौल में मनाया गया। उत्तर मोहल्ला स्थित शमीमुल वरा के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में क्षेत्र के अंजुमन द्वारा देर रात तक मजलिस और नौहाख्वानी का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शामिल होकर हज़रत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत को श्रद्धापूर्वक याद किया।

उलेमाओं ने कर्बला की कुर्बानी का संदेश किया साझा
मजलिस को संबोधित करते हुए उलेमाओं ने बताया कि चेहल्लुम (अरबैन) मुहर्रम की 10वीं तारीख यानी आशूरा के 40 दिन बाद मनाया जाता है। यह दिन पैगंबर हज़रत मोहम्मद साहब के नवासे हज़रत इमाम हुसैन और कर्बला में उनके 72 साथियों की शहादत की याद में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि कर्बला की घटना सत्य, न्याय और इंसानियत की रक्षा के लिए दी गई सर्वोच्च कुर्बानी का प्रतीक है।
मातमी जुलूस और नौहाख्वानी में झलकी अकीदत
चेहल्लुम के अवसर पर काले लिबास में अकीदतमंदों ने मातमी कार्यक्रमों में भाग लिया। इमामबाड़ों और धार्मिक स्थलों पर मजलिसें आयोजित की गईं, जहां कर्बला की घटना, हज़रत ज़ैनब के सब्र और इमाम हुसैन की कुर्बानी पर प्रकाश डाला गया। नौहाख्वानी और मातम के माध्यम से श्रद्धालुओं ने अपने जज़्बात का इज़हार किया।

भाईचारे और इंसानियत का दिया संदेश
इस अवसर पर जगह-जगह अकीदतमंदों के लिए पानी, चाय और अन्य सेवाओं की व्यवस्था की गई। उलेमाओं ने कहा कि चेहल्लुम केवल शोक का दिन नहीं, बल्कि अन्याय और जुल्म के विरुद्ध सत्य एवं इंसानियत के रास्ते पर चलने का संदेश देने वाला अवसर है।
बड़ी संख्या में जुटे लोग
चेहल्लुम के मौके पर बहरियाबाद सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रमों में शामिल हुए। पूरे क्षेत्र में शांतिपूर्ण माहौल में धार्मिक आयोजन संपन्न हुए।
