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आजमगढ़

पंजीयन रद्द व्यापारी भी ले सकते हैं एमनेस्टी स्कीम का लाभ

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आजमगढ़। उत्तर प्रदेश सरकार की प्रेरणा से जीएसटी विभाग ने ब्याज और अर्थदंड माफी की स्वर्णिम योजना लागू की है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए व्यापारियों और उद्यमियों को बीते चार महीनों से जागरूक किया जा रहा है और उनकी शंकाओं व समस्याओं का निराकरण किया जा रहा है।

वैट पीरियड में पहले भी दो बार ब्याज माफी योजना लाई गई थी, लेकिन वह केवल ब्याज और कुछ प्रतिशत छूट तक ही सीमित थी। इस बार सरकार ने व्यापारियों के हित में कदम उठाते हुए भारत सरकार, सीबीआईसी और जीएसटी काउंसिल के समक्ष प्रस्ताव रखकर वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-20 के लिए धारा-73 के अंतर्गत ब्याज और अर्थदंड माफी की योजना लागू करवाई है, ताकि व्यापारियों पर जीएसटी पीरियड की शुरुआत से ही कर का अतिरिक्त बोझ न पड़े।

यह योजना व्यापारियों के लिए बेहद लाभकारी है, क्योंकि इसमें कर की राशि जमा करके ब्याज और अर्थदंड से पूरी तरह राहत मिल रही है। जीएसटी में वैट की तरह सर्वोत्तम न्याय और विवेक से कर निर्धारण नहीं किया जाता, बल्कि साक्ष्य के आधार पर न्याय निर्णयन होता है, जिससे अधिक कर लगने की संभावना नहीं रहती।

इस योजना का लाभ उठाने के लिए व्यापारियों से अपील की गई कि वे किसी भी प्रकार की लापरवाही न करें और 31 मार्च 2025 तक कर की राशि जमा कराकर इस योजना का लाभ उठाएं। इसके बाद एसपीएल-02 फाइल करने की अंतिम तिथि 30 जून 2025 है। जिन व्यापारियों ने पहले ही कर की राशि जमा कर दी है, वे भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।

पंजीयन रद्द हो चुके व्यापारी भी एसपीएल-02 फाइल कर योजना का लाभ ले सकते हैं।इस योजना की जानकारी देने, शंकाओं के समाधान और पक्का बिल लेने-देने के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए 21 मार्च 2025 को नेहरू हॉल, आजमगढ़ में एक विशेष संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें राज्य कर विभाग के अधिकारियों, डिस्ट्रिक्ट टैक्स बार एसोसिएशन और व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में व्यापारियों की शंकाओं का समाधान किया गया और बचे हुए व्यापारियों को शीघ्र एसपीएल-02 दाखिल कर योजना का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया, ताकि सरकार की व्यापारी हितैषी मंशा पूरी हो सके। बैठक में पक्का बिल लेने-देने को लेकर भी जागरूकता अभियान चलाने की अपील की गई।

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